मकराना में इमाम हुसैन की याद में एक रोज़ा जलसा आयोजित, उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। इमाम हुसैन की याद में एक रोजा जलसे का आयोजन शहर के गौड़ा बास स्थित इमाम चौक में सुन्नी नौजवान कमेटी की ओर से आयोजित किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के जायश शरीफ से आए मुख्य वक्ता मौलाना सैयद सलमान अशरफ अशरफी उल जिलानी ने इमाम हुसैन के जीवन और उनकी शहादत पर बयान किया। मौलाना ने कहा कि कर्बला का वाक्या हमें पैगाम देता है कि बातिल के आगे झुका नहीं जाता, बातिल को झुकाया जाता है। भूख और प्यास की परवाह किए बिना इस्लाम की खातिर इमाम हुसैन ने अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी।
इमाम हुसैन ने कर्बला की जंग के दौरान नमाज को नहीं छोड़ा हमें चाहिए कि हम सभी नमाजों की पाबंदी करें। आका हुसैन की गुलामी से जुड़ते हुए अपनी जिंदगी गुजारे। इस दौरान मदरसा अरबीया रहमनिया के तलबाओ ने नात, मनकबत व तकरीर पेश की। खूसूसी शायर के रूप में मौलाना कारी रईस अहमद सिद्दीकी ने जमाने के हर एक वली ने कहाँ मुझे तो अली चाहिए, ये दिल भी हुसैनी है ये जान भी हुसैनी है अल्हद अपना तो ईमान भी हुसैनी है, ये ना पूछ क्या हुसैन है फ्जले किबरिया हुसैन है क्या बताऊ क्या हुसैन है मेरा मुद्दआ हुसैन है जैसी अनेक मनकबत और नात शरीफ पेश की। इस दौरान विभिन्न मस्जिदों के इमाम स्टेज पर मौजूद थे। सलातो सलाम के बाद खुसूसी के साथ जलसा पूर्ण हुआ।


