प्रशासनिक उदासीनता: अधिकारियों से सजीं कुर्सियां, फरियादी नदारद; प्रचार के अभाव में फ्लॉप हुआ नसवारी का 'ग्रामीण सेवा शिविर'
गोविंदगढ़ (अलवर)। सरकार भले ही 'प्रशासन गांवों के संग' जैसे दावों के साथ जनता के द्वार पर शिविर लगा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। सोमवार को उपखंड की ग्राम पंचायत नसवारी में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' प्रशासनिक लापरवाही और प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। करीब 3 हजार से अधिक की आबादी वाली इस पंचायत के शिविर में दिनभर में महज 30 से 35 लोग ही पहुंचे। आलम यह था कि तंबू के नीचे दर्जनभर विभागों के बड़े अधिकारी तो मुस्तैद दिखे, लेकिन जनता के लिए लगाई गईं कुर्सियां दिनभर खाली पड़ी रहीं।
सालों से कीचड़ में जीने को मजबूर ग्रामीण, ₹5 लाख का नाला भी फेल
शिविर में पहुंचे गिने-चुने ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत के खिलाफ जमकर गुब्बार निकाला। मूडपुरी कला निवासी कालूराम जाटव ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके घर के पास मुख्य रास्ते पर वर्षों से कीचड़ और गंदा पानी जमा है।
बार-बार शिकायत के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है। वहीं हरसोली गांव में महात्मा गांधी स्कूल के पास 5 लाख रुपये की लागत से बना नाला पहली ही बारिश में विफल साबित हो चुका है, जिससे स्कूल के पास जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है।
दबंगों के खेतों में बनीं जनता के बजट की टंकियां
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि आम जनता को पेयजल सप्लाई के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत की गईं लगभग 65,000 रुपये की पानी की टंकियां रसूखदार और प्रभावशाली लोगों के खेतों में बना दी गईं। जहाँ न तो पानी का कोई कनेक्शन है और न ही आम जनता की वहां तक पहुंच है। यह सरकारी पैसे का सीधे तौर पर दुरुपयोग है।
अधिकारियों का 'घिसा-पिटा' जवाब: पुराना मामला कहकर झाड़ा पल्ला
जब इस पूरे मामले और टंकियों के दुरुपयोग को लेकर वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी (VDO) आनंद कुमार से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा— "जलभराव की समस्या पानी की निकासी न होने से है। रही बात टंकियों की, तो वह मेरे कार्यकाल से पहले की हैं, इसलिए मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।"
लवाजमा पूरा, पर नीयत अधूरी
शिविर में केवल खानापूर्ति के लिए विभागों की लंबी चौड़ी फौज बुलाई गई थी। मौके पर तहसीलदार राजेंद्र यादव, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विश्वजीत सिंह, विकास अधिकारी रमेश गुर्जर और स्थानीय सरपंच अनवर खान सहित राजस्व, कृषि, बिजली, जलदाय, वन, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास, आयुर्वेद, राजीविका, रसद और रोडवेज विभाग का अमला मौजूद रहा। लेकिन जब जनता को शिविर की जानकारी ही नहीं दी गई, तो इस भारी-भरकम लवाजमे का औचित्य ही खत्म हो गया।


