खैरथल में 'साइलेंट किलर' बना रेलवे फाटक: हर 15 मिनट में लग रहा जाम, जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर शहरवासी
खैरथल। (हीरालाल भूरानी) कभी स्वच्छ हवा और शांत माहौल के लिए अपनी पहचान रखने वाला खैरथल शहर अब धीरे-धीरे वायु और ध्वनि प्रदूषण के गंभीर संकट की गिरफ्त में आता जा रहा है। शहर के बीचों-बीच स्थित रेलवे फाटक नंबर-93 स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। इस फाटक के बार-बार बंद होने के कारण हर 15 से 20 मिनट में यहां वाहनों का लंबा जाम लग रहा है, जिसने पूरे शहर की रफ्तार को तो रोका ही है, साथ ही लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ शुरू कर दिया है।
- चारों तरफ वाहनों की कतारें, चालू इंजन उगल रहे जहर
फाटक बंद होने का असर केवल रेलवे लाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर किशनगढ़ बास रोड, मुख्य बाजार और 40 फुटा रोड अंडरपास तक साफ दिखाई देता है। जाम में फंसे सैकड़ों वाहनों के इंजन घंटों चालू रहते हैं, जिससे निकलने वाला गाढ़ा धुआं, भारी कार्बन उत्सर्जन और बढ़ती गर्मी पूरे वातावरण को जहरीला बना रही है। इसके ऊपर से टूटी सड़कों और निर्माण कार्यों से उड़ती धूल ने कोढ़ में खाज का काम किया है। स्थिति यह हो चुकी है कि लोगों को खुले में साफ हवा में सांस लेना भी दूभर महसूस होने लगा है।
- ध्वनि प्रदूषण से बढ़ा मानसिक तनाव
जाम के दौरान केवल हवा ही जहरीली नहीं हो रही, बल्कि वाहनों के लगातार बजते तीखे हॉर्न ध्वनि प्रदूषण के स्तर को भी खतरनाक सीमा तक पहुंचा रहे हैं। सड़कों पर रेंगते इस ट्रैफिक के बीच लोग घंटों फंसे रहने के कारण मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक थकान जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं।
- बीमार हो रहा बचपन और बुढ़ापा
बढ़ते वायु प्रदूषण का सबसे घातक असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर देखने को मिल रहा है। शहर के बच्चों में अचानक खांसी, त्वचा व गले की एलर्जी और अस्थमा के मामले तेजी से बढ़े हैं। वहीं, बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ और मामूली काम में भी जल्दी थकान महसूस हो रही है।
- विशेषज्ञ की राय: सांस के मरीजों में भारी इजाफा
डॉ. नितिन शर्मा, पीएमओ, खैरथल सैटेलाइट अस्पताल का कहना है- "बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा और बेहद गंभीर असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। खैरथल सैटेलाइट अस्पताल में पिछले कुछ समय में श्वसन संबंधी (सांस के) मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मेरी आम जनता से अपील है कि इस जहरीले धुएं और धूल से बचने के लिए घरों से निकलते समय अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें।" –
- जनता की मांग: कब मिलेगा ओवरब्रिज?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या का एकमात्र स्थाई समाधान रेलवे फाटक नंबर-93 पर ओवरब्रिज (Flyover) या अंडरपास का निर्माण है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो खैरथल की आबोहवा आने वाले दिनों में और ज्यादा जानलेवा हो जाएगी।


