राजस्थान सरकार का बड़ा निर्णय: प्रदेश में 76 नई नगर पालिकाओं का गठन, डीडवाना-कुचामन जिले के विकास को मिलेगी नई गति
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने राज्य के शहरी विकास और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 328 सहपठित धारा 337 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बजट घोषणाओं के तहत प्रदेश में 76 नई नगर पालिकाओं का गठन किया गया है। इस आदेश के तहत डीडवाना-कुचामन जिले के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 'नगर पालिका खाटू खुर्द' का गठन किया गया है। इस निर्णय से स्थानीय स्तर पर शहरी सुविधाओं के विस्तार, बेहतर सफाई व्यवस्था और सुनियोजित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। स्थानीय निवासियों में इस घोषणा को लेकर काफी उत्साह है, क्योंकि अब खाटू खुर्द में नगर पालिका स्तर की नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
684 नए पदों का सृजन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
सरकार ने नवगठित इन 76 नगर पालिकाओं के संचालन के लिए कुल 684 नवीन पदों के सृजन को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। प्रत्येक नगर पालिका के लिए 9 पदों का स्टाफ पैटर्न निर्धारित किया गया है, जिसमें अधिशाषी अधिकारी (चतुर्थ), सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक, वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन पदों के माध्यम से न केवल प्रशासनिक कार्य सुचारू होंगे, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
स्वायत्त शासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नगर पालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार और सफाई कर्मचारियों का कार्य 'आउटसोर्सिंग' के आधार पर कराया जाएगा। इसके साथ ही, विभाग ने वर्ष 2020-21 और 2022-23 में गठित 06 नगर पालिकाओं (गुढ़ागौड़जी, रानीवाड़ा, जावाल, लालगढ़-जाटान, ऋषभदेव और सेमारी) को पुनः ग्राम पंचायत में परिवर्तित करने के कारण, उनके लिए पूर्व में स्वीकृत 54 पदों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश भी दिए हैं।
आदेश के अनुसार, इन पदों के वेतन-भत्तों के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई अनुदान देय नहीं होगा। संबंधित नगरीय निकाय अपने उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कार्मिकों को नियोजित करेंगे और नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया व आरक्षण नियमों के अनुरूप की जाएंगी। यह निर्णय राज्य सरकार की शहरीकरण नीति को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।


