चौरीचौरा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की उठी मांग: रेलवे बोर्ड और पूर्वोत्तर रेलवे को पत्र भेजकर की अपील
चौरीचौरा (गोरखपुर) शशि जायसवाल
ऐतिहासिक और क्रांतिकारी भूमि चौरीचौरा के रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को बढ़ाने और महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के यात्रियों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए भाजपा पिछड़ा मोर्चा (गोरखपुर क्षेत्र) के क्षेत्रीय महामंत्री एवं नगर पंचायत चौरीचौरा मुंडेरा बाजार वार्ड संख्या 15 के निवासी अनूप जायसवाल ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर जनहित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
रेलवे के शीर्ष अधिकारियों को भेजा पत्र
अनूप जायसवाल ने अध्यक्ष (रेलवे भर्ती बोर्ड, भारत सरकार), महाप्रबंधक (पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर) समेत रेलवे के अन्य उच्च अधिकारियों को भेजे पत्र में चौरीचौरा रेलवे स्टेशन पर विभिन्न प्रमुख ट्रेनों के ठहराव को लेकर पुरजोर मांग रखी है।
ये हैं प्रमुख मांगें:
ट्रेन संख्या 5105: चौरीचौरा रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन का वर्तमान ठहराव यथावत (जैसे का तैसा) जारी रखा जाए।
ट्रेन संख्या 5106 (छपरा–गोरखपुर–नौतनवा): यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन का चौरीचौरा स्टेशन पर नया ठहराव शुरू कराया जाए।
ट्रेन संख्या 11123/11124 (ग्वालियर–बरौनी–ग्वालियर एक्सप्रेस): कोरोना काल के दौरान बंद किए गए इस ट्रेन के ठहराव को तत्काल बहाल किया जाए। पत्र में याद दिलाया गया कि इस ट्रेन का चौरीचौरा में लगभग 30 वर्षों तक नियमित ठहराव रहा है, जिसे बंद करने से जनता को भारी परेशानी हो रही है।
ऐतिहासिक भूमि पर बढ़े यात्री, सुविधाएं कम
अनूप जायसवाल ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि चौरीचौरा देश की आजादी के आंदोलन की एक ऐतिहासिक भूमि है, जहाँ देश-विदेश से भी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। वर्तमान में इस क्षेत्र में रेल यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन ट्रेनों के पर्याप्त ठहराव न होने से स्थानीय लोगों और व्यापारियों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अब रेलवे के फैसले पर टिकी निगाहें
उन्होंने रेलवे प्रशासन से अपील की है कि वे जनहित और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन मांगों पर गंभीरता से विचार करें और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लें। स्थानीय निवासियों का भी कहना है कि यदि इन ट्रेनों का ठहराव बहाल होता है, तो क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन जनता की इस बेहद जरूरी मांग पर क्या और कब तक कदम उठाता है।


