त्योहारों की रौनक पर मिलावट खोरो का साया
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
दीपावली का त्यौहार नजदीकी ही है। दीपावली त्योहार का नाम आते ही मन में खुशियों मिठास और भाईचारे की तस्वीर उभरती है।
लेकिन अफसोस इन खुशियों की थाली में अब मिलावट खोरी का जहर घुलने लगा है। मिठाई हो या दूध मसाले हो या तेल हर चीज में लालच की परते चढ़कर इंसानियत को दाव पर लगाया जा रहा है। कुछ व्यापारी थोड़े से मुनाफे के लिए समाज की सेहत और त्योहार की रौनक लूट रहे हैं। त्योहार जो स्वाद और सौहार्द के लिए होने चाहिए वहीं अब मौत और बीमारी का संदेश देने लगे हैं। यह स्थिति केवल शर्मनाक नहीं बल्कि खतरनाक अपराध है। मिलावट कोई गलती ही नहीं बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ जो मिठास में जहर घोल रहा है। ऐसे मिलावट खोर कानून की पकड़ में आने के बाद भी बेखोफ रहते हैं ।कोर्ट से जमानत मिलते ही वे फिर वही खिलौना धंधा शुरू कर देते हैं ।सवाल उठता है कि जब जनता का जीवन दाव पर है तो कानून उन्हें क्यों नहीं डराता जनता का आक्रोश अब यही कह रहा है कि सरकार दिखावटी कार्रवाई छोड़कर हकीकत में कदम उठाए केवल छापे मारी और जुर्मानी से काम नहीं चलेगा जरूरत है ऐसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जिसमें मिलावटखोर को नकली मिठाई बेचने से पहले 100 बार सोचे। और डर के मारे पीछे हट जाएं त्यौहार की रौनक तभी सच्ची होगी जब हर मिठाई में विश्वास होगा न की जहर अब सरकार और समाज दोनों को मिलकर यह है संकल्प लेना होगा की मिलावटखोरों पर ऐसा शिकंजा कसा जाए कि वह दोबारा इंसानियत के खिलाफ यह गुनाह करने की हिम्मत न जुटा सके।


