राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ ने सम्पूर्ण एवं निरंतर स्वच्छता में आ रही व्यहारिक एवं तकनीकी समस्याओं के समाधान ज्ञापन सौंपा
जयपुर (बरकत खान) राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ ने प्रदेश में संपूर्ण एवं निरंतर स्वच्छता अभियान के तहत आ रही गंभीर व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ की प्रदेश प्रतिनिधि सभा की वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) बैठक में लिए गए निर्णय के तहत पूरे प्रदेश में जिला और उपशाखा कार्यकारिणी द्वारा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं पंचायत समिति के विकास अधिकारी (BDO) के माध्यम से पंचायतीराज मंत्री एवं शासन सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
- भौगोलिक परिस्थितियां अलग, पर BSR दरें एक समान
जिलाध्यक्ष भगवत सिंह राठौड़ ने बताया कि पूरे प्रदेश में स्वच्छता की BSR दरें एक समान लागू की गई हैं, जो कि पूरी तरह अव्यावहारिक हैं। विभिन्न जिलों और ग्राम पंचायतों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। प्रत्येक पंचायत में कार्य वहां की सघन आबादी, आवागमन के साधनों, बाजार की उपलब्धता और नालियों की लंबाई पर निर्भर करता है। इसके अनुसार सफाई कार्य कहीं प्रतिदिन, तो कहीं साप्ताहिक या पाक्षिक रूप से कराना पड़ता है।
- अस्पष्ट निविदा प्रक्रिया और संसाधनों का अभाव
जिला मंत्री प्रकाश कुमार मीना ने जानकारी दी कि वर्तमान में स्वच्छता कार्य की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। इसका फायदा उठाकर एक ही फर्म कई पंचायतों में ठेके हथिया लेती है। ऐसी कई फर्में मैदान में आ गई हैं, जिनके पास न तो स्वच्छता से संबंधित आवश्यक सामग्री और तकनीकी संसाधन हैं और न ही पर्याप्त मानव संसाधन (लेबर)।
- बजट अटका, पोर्टल बंद, स्वीकृतियां रुकीं
प्रदेश प्रतिनिधि शिवरतन सोलंकी ने बताया कि पूर्व में BSR दर पर कार्य कराने को लेकर सहमति तो बनी थी, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो पाया है। इसके अलावा, वर्ष 2026-27 का केंद्रीय वित्त आयोग का GPDP प्लान आज तक न तो अप्रूव हुआ है और न ही पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहा है, जिससे विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं हो पा रही है।
- हजारों करोड़ का अनुदान बकाया, अधिकारियों पर गिर रही गाज
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, पंचायतों में राज्य वित्त आयोग (SFC) और 15वें वित्त आयोग की हजारों करोड़ रुपये की अनुदान राशि सरकार के स्तर पर बकाया है। बजट के अभाव में स्वच्छता कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत जाने बिना जनप्रतिनिधि और उच्च अधिकारी वर्ग ग्राम विकास अधिकारियों (VDOs) के विरुद्ध एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रहे हैं, जो कि पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है।
समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी संघ के प्रतिनिधि भरत गेहलोत ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई है कि ग्राम विकास अधिकारियों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त किया जाए और बजट व नियमों से जुड़ी समस्याओं का स्थाई समाधान निकाला जाए। यदि सरकार ने इस पर उचित कदम नहीं उठाए, तो संगठन को मजबूरन पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।


