बारां में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, दूषित पानी से कभी भी हो सकती है बड़ी जनहानि- भाया

Jun 12, 2026 - 19:42
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बारां में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त,  दूषित पानी से कभी भी हो सकती है बड़ी जनहानि- भाया

अन्ता (शफीक मंसूरी ) विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बारां जिले की बदहाल पेयजल व्यवस्था को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर जल जीवन मिशन एवं अमृत मिशन के तहत बनाई गई पेयजल योजनाएं धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
भाया ने केबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चोधरी को भेजे विस्तृत पत्र में कहा है कि बारां शहर सहित अंता, मांगरोल, सीसवाली, अटरू, छबड़ा, छीपाबड़ौद तथा जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था चरमरा चुकी है। कई स्थानों पर लोगों को कीड़े-मकोड़ों, दुर्गन्धयुक्त तथा मटमैले दुष्टषित पानी का सेवन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद 5-5 और 6-6 दिन तक जलापूर्ति बाधित रहना विभागीय लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि 10 जून को बारां शहर के प्रताप चैक पर आम नागरिकों को दूषित पेयजल के विरोध में धरना देना पड़ा। वहीं सीसवाली में महिलाओं ने आठ दिन तक पानी नहीं मिलने पर मटकी फोड़कर विरोध प्रदर्शन किया। समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के अनुसार कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से अन्ता-नागदा-बल्देवपुरा परियोजना का पेयजल प्लांट तक बंद हो गया, जिससे जलापूर्ति और अधिक प्रभावित हो गई है।भाया ने बताया कि 3 जून को हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं आमजन के साथ जिला कलक्टर कार्यालय के सामने विशाल धरना देकर सरकार और प्रशासन को चेताया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन ठेकेदारों को योजनाओं के 10 वर्ष के रख-रखाव का जिम्मा दिया गया है, वे न तो रख-रखाव का कार्य कर रहे हैं और न ही स्थानीय श्रमिकों को समय पर भुगतान कर रहे हैं।
उन्होंने जिले के अधीक्षण अभियन्ता एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजनाओं के फिल्टर प्लांटों में गंदगी, कीड़े-मकोड़े और तकनीकी खामियां होने के बावजूद कोई प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की योजनाएं जनता को अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही हैं। प्रमोद जैन भाया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दूषित पेयजल के कारण किसी प्रकार की जनहानि होती है तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी जलदाय विभाग, जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जल जीवन मिशन और मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी घोषणाओं के बावजूद बारां की जनता को शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाया ने केबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी से मांग की है कि बारां जिले में जलदाय विभाग के अकर्मण्य अधिकारियों एवं लापरवाह ठेकेदारों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए तथा जिले में नियमित एवं शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और किसी संभावित अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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