खुद को पीड़ित बताकर दर्ज कराया था साइबर ठगी का झूठा केस, पुलिस ने जालसाज और उसके साथी को दबोचा
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तीन लोगों से की थी ₹6.40 लाख की ठगी, खुद को बचाने के लिए रची झूठी कहानी
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थानागाजी पुलिस ने बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार
अलवर (अनिल गुप्ता) साइबर ठगी की राशि को ठिकाने लगाने और खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करना दो युवकों को भारी पड़ गया। थानागाजी थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ साइबर ठगी के झूठे मुकदमे का भंडाफोड़ किया, बल्कि साजिश रचने वाले परिवादी और उसके साथी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपी अंगारी निवासी महेश चंद मीना (26) और बलराम मीणा (21) हैं।
- खुद को पीड़ित बताकर दर्ज कराया था मामला
पुलिस के अनुसार, आरोपी महेश चंद मीना ने गत 12 मई को थाने में उपस्थित होकर एक शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि बलराम मीणा ने उसे विश्वास में लेकर उसके बैंक खाते से 1,40,500 रुपये की साइबर ठगी कर ली है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जब तकनीकी और बैंक खातों की जांच शुरू की, तो परत दर परत सच सामने आने लगा और पुलिस भी हैरान रह गई।
- जांच में खुली पोल: ₹6.40 लाख की ठगी का मास्टरमाइंड निकला परिवादी
पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि जिसे महेश चंद साइबर ठगी बता रहा था, वह दरअसल उसकी और बलराम की मिलीभगत से रचा गया एक बड़ा षड्यंत्र था। महेश ने तीन अलग-अलग व्यक्तियों को अपने जाल में फंसाकर कुल 6,40,500 रुपये की साइबर ठगी की थी और यह राशि अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवाई थी। इस राशि में से उसने 1,40,500 रुपये नकद निकालकर अपने साथी बलराम मीणा को सौंप दिए थे। खुद पर आंच न आए और मामला किसी और के सिर मढ़ दिया जाए, इसके लिए महेश ने खुद ही पीड़ित बनकर बलराम के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया।
कड़ी कानूनी धाराओं में मामला दर्ज - पुलिस जांच में साइबर ठगी की यह शिकायत पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत पाई गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) [धोखाधड़ी], 314, 61(2) [आपराधिक षड्यंत्र] और आईटी एक्ट की धारा 66 डी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इन दोनों से यह पूछताछ कर रही है कि इन्होंने किन तीन लोगों से यह ₹6.40 लाख की ठगी की थी।


