रोवाड़ा में ध्वलेश्वर महादेव प्रांगण में पक्षी आवास का लोकार्पण, समाज सेवा में आगे आने का किया आह्वान
शिवगंज / बरकत खा
रोवाड़ा स्थित ध्वलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भामाशाह शैतान कुमार की अाैर से अपने पिता की स्मृति में नवनिर्मित वक्ताे बा पक्षी आवास (पक्षी घर) का लोकार्पण समारोह गुरुवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार एवं पूर्व सिरोही विधायक संयम लोढ़ा तथा सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी रहे हरिशंकर मेवाड़ा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। लोढ़ा ने नारियल फोड़कर पक्षी आवास का विधिवत उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि व्यक्ति को हमेशा अच्छे कार्य करने चाहिए। यदि स्वयं कोई अच्छा कार्य नहीं कर सकता तो दूसरों को प्रेरित करना चाहिए और यदि वह भी संभव नहीं हो तो जो लोग समाजहित में कार्य कर रहे हैं, उनके कार्यों का समर्थन और अनुमोदन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में मिली सारी उपलब्धियां समाज की देन हैं, इसलिए समाज के प्रति हमारा भी दायित्व बनता है। लोढ़ा ने कहा कि मनुष्य जब जन्म लेता है तब उसके पास कुछ नहीं होता। नाम, पद, प्रतिष्ठा और संपदा सब कुछ समाज से ही मिलता है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का कुछ हिस्सा समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 10 हजार रुपए कमाता है तो उसके मन में कम से कम एक हजार रुपए समाज के लिए खर्च करने का भाव होना चाहिए। इससे आत्मसंतोष मिलता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिशंकर मेवाड़ा ने की। उन्होंने पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए पक्षी आवास निर्माण को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि ऐसे कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। मेवाड़ा ने भामाशाह शैतान कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया है। कार्यक्रम के दौरान संयम लोढ़ा ने कबीरदास के दोहों का उल्लेख करते हुए दान और परोपकार की परंपरा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों और मूक प्राणियों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिकाें ने श्री सादुल सिंह जी दाता दरबार के दर्शन किए। सभी ने पक्षियों के लिए बनाए गए आवास की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और जीव दया की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। अंत में महाप्रसादी के साथ सम्पन्न हुअा।


