टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट की मांग: 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने डीग में निकाला आक्रोश मार्च

Jun 18, 2026 - 19:24
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टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट की मांग: 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने डीग में निकाला आक्रोश मार्च

डीग (नीरज जैन) अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (स्कूल शिक्षा) के आह्वान पर गुरुवार को डीग जिला मुख्यालय पर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद अपनी सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति को लेकर आशंकित शिक्षकों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की मांग उठाई।

जिला कलेक्ट्रेट पर निकाली रैली

शिक्षक सुबह 11 बजे डीग के किशन लाल जोशी स्कूल के बाहर एकत्र हुए। इसके बाद जिलाध्यक्ष अनिल सीही और जिला मंत्री देवेंद्र यादव के संयुक्त नेतृत्व में शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्रेट तक एक विशाल रैली निकाली। रैली के बाद शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी असुरक्षा की भावना

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अनिल सीही ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को टीईटी को न्यूनतम योग्यता के रूप में अधिसूचित किया था। लेकिन हाल ही में, 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक निर्णय के बाद वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। इस फैसले के कारण अब पुराने शिक्षकों को भी अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है, जिससे राज्य सहित देशभर के लाखों शिक्षकों में भारी असुरक्षा की भावना है।

"बाद में बने नियम पहले की नियुक्तियों पर लागू करना अन्यायपूर्ण"

जिला मंत्री देवेंद्र यादव ने विधिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था का यह स्थापित नियम है कि कोई भी नीति या अधिसूचना उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है (Prospective effect)। उन्होंने कहा: "जो शिक्षक 2010 से पहले उस समय के नियमों और योग्यता के आधार पर विधिवत नियुक्त हो चुके हैं और बरसों से सेवाएं दे रहे हैं, उन पर बाद में बने पात्रता मानदंड थोपना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। यह आंदोलन केवल नौकरी का नहीं, बल्कि शिक्षकों के परिवारों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा है।"

महासंघ की प्रमुख मांगें:

  • स्थायी मुक्ति: 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
  • सेवा संरक्षण: इन शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य परिलाभों को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा जाए।
  • संसद में संशोधन: यदि आवश्यक हो, तो केंद्र सरकार संसद में विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान करे।
  • स्पष्ट दिशा-निर्देश: केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में तुरंत स्पष्ट गाइडलाइंस जारी करे ताकि शिक्षकों में व्याप्त भ्रम और असमंजस की स्थिति समाप्त हो।

डीग जिले के सभी छह खंडों से आए सैकड़ों शिक्षकों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस अवसर पर महासंघ के संभाग संयुक्त मंत्री पदम सिंह, सौरभ शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह, नरेश यादव, वंशीलाल, जगवीर सिंह, जयसिंह कुंतल, होशियार सिंह, भगत सिंह, संतोष कश्यप सहित महिला विंग से प्रीति खंडेलवाल, सुनीता, रेखा अग्रवाल, सीमा गुप्ता सहित भारी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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