बैंकों की मनमानी पर RBI सख्त; ग्राहकों को गुमराह किया तो होगी कड़ी कार्रवाई, नए नियम 1 जनवरी से लागू
नई दिल्ली (कमलेश जैन) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए कमर्शियल बैंकों की मनमानी और 'मिस-सेलिंग' (गुमराह करके प्रोडक्ट बेचना) पर पूरी तरह लगाम लगा दी है। आरबीआई ने 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक) दूसरा संशोधन निर्देश 2026' जारी किया है। इसके तहत अब बैंक ग्राहकों पर कोई भी स्कीम या इंश्योरेंस पॉलिसी जबरन नहीं थोप पाएंगे। यदि कोई बैंक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश देश के सभी कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और लोकल एरिया बैंकों पर लागू होंगे। आरबीआई ने बैंकों को अपनी व्यवस्था में सुधार करने के लिए करीब साढ़े छह महीने का समय दिया है, जिसके बाद 1 जनवरी 2027 से ये नियम पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?
अक्सर देखा जाता है कि ग्राहक बैंक में फिक्स डिपॉजिट (FD) या सामान्य पूछताछ के लिए जाते हैं, लेकिन बैंक स्टाफ या एजेंट उन्हें लोन, क्रेडिट कार्ड या अनचाही इंश्योरेंस पॉलिसी थमा देते हैं। इसके अलावा, डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग में भी कई ऐसे 'मिसलीडिंग' विकल्प होते हैं, जिन पर गलती से क्लिक होते ही ग्राहक की सहमति के बिना ही प्रोडक्ट एक्टिवेट हो जाता है। इसी धोखाधड़ी और मनमानी को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।
नए दिशानिर्देशों की मुख्य बातें:
- स्टाफ और एजेंटों की पहचान होगी अलग: बैंकों को अपने नियमित स्टाफ और थर्ड-पार्टी एजेंटों (DSA/DMA) के बीच साफ अंतर दिखाना होगा। इसके लिए अलग ड्रेस कोड या आईडी कार्ड का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
- कर्मचारी होने का झूठा दावा नहीं: कोई भी थर्ड-पार्टी एजेंट खुद को बैंक का परमानेंट कर्मचारी बताकर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकेगा और न ही बैंक की तरफ से कोई झूठा वादा कर सकेगा।
- समय सीमा तय (सुबह 9 से शाम 7): बैंक के रिकवरी या लोन एजेंट ग्राहकों को केवल सुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं।
- बिना मर्जी घर या ऑफिस आने पर रोक: ग्राहक की पूर्व अनुमति (Consent) के बिना कोई भी एजेंट उनके घर या कार्यस्थल पर नहीं जा सकता।
- वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी: बैंकों को अपने सभी अधिकृत एजेंटों (DSA) की लिस्ट और उनका 'कोड ऑफ कंडक्ट' (नियम पुस्तिका) वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। लिस्ट में किसी भी बदलाव को 7 दिनों के भीतर अपडेट करना होगा।


