लापरवाही: समाजशास्त्र के पेपर में छात्रों को बांट दी 'आंसर-की', परीक्षा में हुआ बवाल; परीक्षा निरस्त, अब 27 जून को होगा एग्जाम
प्रश्नपत्र की जगह सीधे उत्तर देख हैरान रह गए 300 छात्र, परीक्षा हॉल में जमकर हुआ बवाल; दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जयपुर (कमलेश जैन) राजस्थान के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित राजस्थान विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था मंगलवार को उस वक्त पूरी तरह बेपटरी हो गई, जब एक परीक्षा केंद्र पर छात्रों को प्रश्नपत्र (क्वेश्चन पेपर) बांटने की जगह सीधे 'आंसर-की' (उत्तर कुंजी) थमा दी गई। एग्जाम हॉल में बैठे छात्र उस समय हैरान रह गए जब उन्हें प्रश्नों के साथ उनके हल भी छपे हुए मिले। कुछ ही पलों में परीक्षा हॉल का माहौल ऐसा हो गया मानो परीक्षा से पहले ही यूनिवर्सिटी ने परिणाम जारी कर दिया हो। इस बड़ी चूक के बाद छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया और परीक्षा देने से साफ इनकार कर दिया।
- 300 छात्रों के हाथ में पहुंची उत्तर कुंजी, यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल
यह हैरान करने वाला मामला एमए (समाजशास्त्र) द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान सामने आया, जिसमें करीब 300 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। जैसे ही छात्रों को पेपर बांटे गए, उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। हालांकि, शिक्षकों को जैसे ही अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने आनन-फानन में छात्रों से वो कॉपियां वापस ले लीं, लेकिन तब तक तीर कमान से छूट चुका था।
इस घोर लापरवाही से नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्र नेता लक्ष्यराज लुहारिया ने कुलपति और प्रशासन को घेरते हुए कहा: "परीक्षा जैसी अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया में इस तरह की बचकानी और बड़ी लापरवाही विश्वविद्यालय की साख को मिट्टी में मिलाती है। अगर सीधे आंसर-की ही बांट दी जाएगी, तो परीक्षा की शुचिता कैसे बचेगी? दोषी अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।"
- कैसे हुई इतनी बड़ी चूक? सीलबंद लिफाफे ने उलझाया खेल
विश्वविद्यालय सूत्रों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, पेपर सेटर द्वारा प्रश्नपत्र और उसकी आंसर-की को अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में भेजा जाता है। लेकिन प्रिंटिंग प्रेस में छपाई के दौरान भारी मानवीय भूल हुई। कर्मचारियों ने 'उत्तर कुंजी' वाले लिफाफे को गलती से प्रश्नपत्र समझ लिया और उसकी हजारों कॉपियां प्रिंट कर सीलबंद पैकेट परीक्षा केंद्रों पर भिजवा दीं। चूंकि परीक्षा शुरू होने से पहले ये पैकेट खोले नहीं जाते, इसलिए यह ऐतिहासिक चूक समय रहते पकड़ी नहीं जा सकी।
- परीक्षा तत्काल प्रभाव से निरस्त, जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ते ही विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत बैकफुट पर आ गया। गंभीरता को देखते हुए इस परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त (कैंसल) कर दिया गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष: परीक्षा नियंत्रक राकेश राव ने बताया कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस लापरवाही में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। निरस्त की गई यह परीक्षा अब आगामी 27 जून को दोबारा आयोजित की जाएगी।


