राष्ट्रीय प्रेस दिवस, स्वतंत्र प्रेस ही लोकतंत्र की आत्मा है

Nov 16, 2025 - 12:52
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राष्ट्रीय प्रेस दिवस, स्वतंत्र प्रेस ही लोकतंत्र की आत्मा है

अलवर (कमलेश जैन) राष्ट्रीय प्रेस दिवस हर साल 16 नवंबर को मनाया जाने वाला दिवस मीडिया की स्वतंत्र आवाज और जिम्मेदारी की भूमिका को मजबूत करने का काम करता है। इसी दिन भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना से सीधी शुरुआत हुई, जिसने 1966 में इसी तारीख को अपना कार्य शुरू किया था। 1966 में आज ही के दिन भारतीय प्रेस काउंसिल ने काम करना शुरू किया था। काउंसिल की स्थापना 4 जुलाई को हुई थी और 16 नवंबर से इसकी कार्यकारी शुरुआत हुई थी, इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्थापना के बाद प्रेस काउंसिल एक स्वतंत्र प्रहरी के रूप में काम कर रही है। इसका लक्ष्य पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखना और प्रेस को बाहरी दबाव और हस्तक्षेप से बचाना है। डिजिटल दौर ने फेसबुक न्यूज की चुनौती को बढ़ाया है, ऐसे में मीडिया की मान्यता और प्रतिष्ठा का महत्व और भी बढ़ जाता है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस लोकतंत्र को याद दिलाता है कि एक स्वतंत्र, कार्यकर्ता और जिम्मेदार प्रेस ही उसकी असली ताकत है।
पत्रकार मात्र समाचार ही नहीं लिखता,वह समाज की मनोदशा को पढ़ता है। प्रतिदिन समाचार पत्रों के पृष्ठ से लेकर मोबाइल स्क्रीन पर अस्त-व्यस्त घटनाओं तक पत्रकार एक अदृश्य दायित्व का निर्वहन करता है।
 प्रेस दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि लोकतंत्र के चार स्तंभों में चौथा स्तंभ जो अघोषित ही सही, जनता का एक मुखर स्वर है।
सत्य का मार्ग कितना ही कांटों भरा क्यों न हो परन्तु पत्रकार की लेखनी रुकती नहीं है।  जो सत्य के साथ खड़ा रहे वही सही मायनों में पत्रकार कहलाता है।
वर्तमान परिदृश्य में जब सूचना युद्ध की तरह फैलती है, फेक न्यूज का स्वर सत्य को दबाने का  प्रयास करता है, तब पत्रकारिता का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक पत्रकार अपनी सुरक्षा से ऊपर उठकर कभी सड़क पर, कभी सीमा पर, कभी भीड़ के बीच, तो कभी सत्ता के सवालों में डटा रहता है। समाज को जागरूक रखने का यह संकल्प ही उसे विशेष बनाता है। पत्रकार लिखते हैं तो समाज जागृत हो उठता है, हर शब्द उनका एक जिम्मेदारी का दर्पण होता है।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस इस बात का भी स्मरण करवाता है कि स्वतंत्र प्रेस ही लोकतंत्र की आत्मा है।जहां पत्रकार निडर व निर्भीक होकर प्रश्न करता हैं, वहीं समाज सही दिशा में बढ़ता है। सरकारों की नीतियां तब ही निष्पक्ष रहती हैं जब लेखनी में साहस और माइक्रोफोन में सत्य का स्वर होता है। आज हम उन सभी पत्रकारों को नमन करते हैं जो सत्य लिखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, जो रात-दिन समाज की आवाज़ बनते हैं और जो विपरीत परिस्थितियों के पश्चात भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस मात्र पत्रकारों का उत्सव नहीं यह एक नागरिक के रूप में हमें हमारी जिम्मेदारी का भी स्मरण कराता है कि हम सत्य का साथ दें, पत्रकारिता का सम्मान करें और स्वतंत्र प्रेस की रक्षा में खड़े रहें।

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