आवारा पशुओं का आतंक: सांड के हमले में घायलों का जिम्मेदार कौन? सवाल पर अफसर मौन
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) कस्बे में आवारा सांड एवं पशुओं का आतंक लगातार बढ़ रहा है। न जाने कितने लोग सांडों की आपसी लड़ाई में चोटिल हो चुके हैं। इनकी वजह से चोट खा चुके हैं। लेकिन सरकारी विभागों के पास घायलों का कोई आंकड़ा नहीं है। गौर करने वाली बात यह है कि वन्यजीवों के हमले में घायल और मृतकों का पूरा रिकार्ड रखने के साथ वन विभाग मुआवजा भी देता है। लेकिन शहरी क्षेत्र में समस्या बन चुके आवारा छुट्टा पशु अगर किसी के जीवन को खतरा पहुंचाएं तो उपचार कराने के पैसे भी जेब से भरने पड़ते हैं।
घटना आज सुबह मालाखेड़ा रोड स्टेट हाईवे खंड मुख चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सामने साडो की आपसी लड़ाई में राहगीर लोग निकलने में परेशान नजर आए। भाजपा नेता जैकी खंडेलवाल ने बताया कि कस्बे में अवारा पशुओं खासकर सांडों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।स्थानीय लोग समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन देने के साथ मौखिक समस्या से अवगत कराने की पश्चात भी कुर्सी से चिपके अधिकारी समाधान खोजने में फिलहाल असमर्थ नजर आ रहे हैं। समस्या से निजात दिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नगर पालिका के पास है। लेकिन उसके पास न सांड पकड़ने के संसाधन हैं और न ही विशेषज्ञ।
स्थायी समाधान के लिए सरकारी तंत्र को धरातल पर उतरना पड़ेगा। तभी कस्बे वासी इस समस्या से बाहर आ सकेगे। गोवंशीय के लिए भी सड़क पर रोज खतरा.... गोवंशीय पशुओं के लिए भी सड़क पर खतरा है। कई बार बड़े वाहन इन्हें टक्कर मार देते हैं। बेसहारा होने की वजह कोई देखभाल भी नहीं करता।
शनिवार को एक सांड बीमार हालत में मालाखेड़ा रोड पर बैठा हुआ था। जिसके मुंह से झाग निकल रहे थे। बीमारी से ग्रस्त होने पर जागरूक नागरिक को ने नगर पालिका प्रशासन को जैकी खंडेलवाल विशाल झालानी विजय तिवारी राजू नागपाल प्रकाश प्रजापत द्वारा सूचना दी, पशु हेल्पलाइन 1962 पर भी सूचना देने के उपरांत कोई कार्यवाही नहीं हुई। सरकारी सिस्टम से ज्यादा कुछ गो सेवक इनके उपचार और खाने की व्यवस्था करने में जुटते हैं।