राष्ट्र-सेवा ही परम धर्म, देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा देता है गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन - बेढ़म
गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर बृजनगर में गुरुद्वारों में मत्था टेक लंगर सेवा कर दिया सामाजिक समरसता का संदेश
डीग (नीरज जैन) राष्ट्र-सेवा ही परम धर्म और ईश्वर की सच्ची पूजा है। जब देश और धर्म की रक्षा की बात आई, तब गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने अपने चारों साहिबजादों सहित सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यही त्याग और बलिदान भारत को महान राष्ट्र बनाता है।
यह बात प्रदेश के गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सिखों के दसवें गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाश पर्व के अवसर पर व्यक्त किए।
गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर सोमवार को गृह राज्य मंत्री बेढम डीग जिले के बृजनगर विधानसभा क्षेत्र के गांव सादपुरी एवं पुनांय स्थित गुरुद्वारों में पहुंचे, जहां उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली और शांति की कामना की।
संगत को संबोधित करते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र-सेवा, साहस और धर्म-रक्षा का जीवंत संदेश है। उन्होंने कहा कि आज के समय में हर नागरिक को जाति, वर्ग और मतभेद से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि मानना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री बेढ़म ने राजकीय औपचारिकताओं से हटकर लंगर सेवा में भाग लिया। उन्होंने कड़ाही में कड़छी चलाकर तथा पंगत में श्रद्धालुओं को अपने हाथों से प्रसादी वितरित कर यह संदेश दिया कि गुरु के दरबार में सभी समान हैं और सेवा ही सच्ची श्रद्धा है।
इस अवसर पर सिख समाज के प्रबुद्धजनों एवं ग्रंथियों द्वारा गृह राज्य मंत्री बेढम को सिरोपा ओढ़ाकर तथा शमशीर (कृपाण) भेंट कर सम्मानित किया गया। मंत्री बेढम ने शमशीर को माथे से लगाकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया, जो शक्ति और भक्ति के समन्वय का प्रतीक रहा।
गृह राज्य मंत्री बेढम के आगमन पर सादपुरी और पुनांय गांवों का वातावरण “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” और “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
इस गरिमामयी आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधि, सिख समाज के वरिष्ठ नागरिक, युवा वर्ग एवं मातृ-शक्ति बड़ी संख्या में मौजूद रही। कार्यक्रम ने राष्ट्र-सेवा, सामाजिक समरसता और बलिदान की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।


