महाशिवरात्रि 15 फरवरी को शक्तिशाली ,रात्री में पूजा

Feb 12, 2026 - 01:32
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महाशिवरात्रि 15 फरवरी को शक्तिशाली ,रात्री में पूजा

लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन 

महादेव की आराधना का सबसे पावन पर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, यह पर्व प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।हिंदू धर्म में इस रात्रि को अत्यंत चमत्कारी और रहस्यमयी माना गया है। इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। 
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि इस पावन रात्रि में श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजन, रुद्राभिषेक और विविध धार्मिक उपाय करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग महाशिवरात्रि के मूल आध्यात्मिक महत्व को गहराई से जानते हैं।
 पं. शर्मा ने बताया महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण की रात्रि है। उनका कहना है कि यह पर्व 15 फरवरी को शुभ संयोग में मनाया जाएगा।शास्त्रों में शिवरात्रि को सबसे शक्तिशाली रात्रियों में से एक बताया गया है। यह हिंदू धर्म की प्रमुख आध्यात्मिक रात्रियों में शामिल है, जिसमें साधना और तप का विशेष महत्व होता है।
शिवरात्रि के मध्यकाल का है विशेष महत्व
पं. शर्मा के अनुसार, शिवरात्रि में मध्यरात्रि या मध्यकाल का समय सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, जिसे निषेध काल भी कहा जाता है।यही वह समय होता है जब भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस काल में किया गया जप, ध्यान और अभिषेक अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि
 शिवरात्रि मनाने के पीछे केवल एक ही कथा नहीं, बल्कि अनेक दिव्य रहस्य और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे।यही वह रात्रि मानी जाती है जब माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। शिवरात्रि को अज्ञान के अंत और ज्ञान के उदय का प्रतीक भी माना जाता है। यह पर्व मानव को कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। आध्यात्मिक दृष्टि से भगवान शिव को योगी, ध्यानी और मौन साधक के रूप में देखा जाता है।
शिवरात्रि पर अवश्य करें ये कार्य
 महाशिवरात्रि की रात्रि में शिव तत्व और पृथ्वी तत्व अत्यंत सक्रिय रहते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इस दिन ध्यान, जप और तप अवश्य करना चाहिए। इस रात्रि में की गई साधना कई गुना फल देने वाली मानी जाती है। महाशिवरात्रि को मन को शांत करने, कर्मों को शुद्ध करने और जीवन की दिशा को सकारात्मक रूप से बदलने वाली रात्रि कहा गया है।

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