ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा बढ़ाने की जरुरत - सीताराम गुप्ता
भरतपुर (विष्णु मित्तल) राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य तभी बन सकता है जब सरकार और ऊर्जा नीतियों में बदलाव कर विद्युत प्रसारण व ग्रिड तंत्र को मजबूत करे ! इस सम्बंध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वर्तमान में गुजरात सरकार सौर ऊर्जा का अधिक लाभ प्राप्त कर रही है किन्तु राजस्थान जहाँ सौर ऊर्जा प्राप्ति की अपार संभावनाएं होते हुए भी
इसका लाभ नही ले पा रहे है ! ऐसी स्थिति में राज्य को सौर ऊर्जा का हब बनाने के लिए अलग से मंत्रालय बनाकर नीतियों में बदलाव लाना होगा !
गुप्ता द्वारा लिखे पत्र में कहा है कि राजस्थान लगभग 35 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता वाला राज्य है तथा देश की लगभग 27 प्रतिशत सौर ऊर्जा का उत्पादन करता है, लेकिन आवश्यक विद्युत प्रसारण अवसंरचना, ग्रिड क्षमता एवं ऊर्जा भंडारण व्यवस्था का अपेक्षित विस्तार नहीं हो पाने के कारण बड़ी मात्रा में उत्पादित सौर ऊर्जा का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। कई बार उत्पादन को बाध्य होकर रोकना पड़ता है, जिससे राज्य एवं देश को आर्थिक एवं ऊर्जा संबंधी नुकसान उठाना पड़ता है।
पत्र में निदेशक सीताराम गुप्ता ने आर्थिक विश्लेषण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सौर ऊर्जा व्यवस्था “अपनी अभूतपूर्व सफलता की स्वयं पीड़ित” बनती जा रही है, क्योंकि उत्पादन क्षमता की तुलना में विद्युत प्रसारण एवं भंडारण अवसंरचना पर्याप्त गति से विकसित नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा है कि यदि समय रहते ट्रांसमिशन नेटवर्क एवं ग्रिड क्षमता का विस्तार नहीं किया गया तो भविष्य में यह राष्ट्रीय विकास, औद्योगिक विस्तार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से भड़ला, जैसलमेर एवं अन्य सौर ऊर्जा पार्कों से उत्पादित बिजली को देश के बड़े औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए उच्च क्षमता विद्युत प्रसारण गलियारों के शीघ्र विकास की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 765 केवी एवं 400 केवी की कई महत्वपूर्ण विद्युत लाइनों में विलंब के कारण अनेक अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए सुझावों में सौर ऊर्जा एवं ग्रिड विस्तार हेतु पृथक उच्च स्तरीय निगरानी व्यवस्था स्थापित करने, 765 केवी खेतड़ी–नरेला डबल सर्किट लाइन, 765 केवी भड़ला-द्वितीय–सीकर-द्वितीय लाइन तथा 400 केवी नरेला–महारानी बाग लाइन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने, विभिन्न ग्रिड स्टेशनों पर पर्याप्त ट्रांसफॉर्मर क्षमता स्थापित करने तथा स्मार्ट ग्रिड एवं बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण अवसंरचना विकसित करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान अपनी पूर्ण सौर क्षमता का प्रभावी उपयोग करता है तो राज्य न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि हरित अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास एवं भविष्य की एआई आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा। राजस्थान को “हरित ऊर्जा शक्ति केन्द्र” बनाने के लिए दूरदर्शी योजना एवं मजबूत विद्युत प्रसारण अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है।


