ईंट भट्टे की चिमनी से धुआं निकलने का इन्तजार, ईंट थपाई जारी: भरतपुर-डीग में एक मार्च की शुरू होंगे भट्टे
- एनसीआर नियम के तहत 122 दिन ही संचालित होंगे भट्टे
हलैना( विष्णु मित्तल) एनसीआर क्षेत्र में संचालित ईंट भट्टों की चिमनी से एक मार्च को धुआं निकलेगा, जिसका भरतपुर-डीग जिले से सभी भट्टे संचालक तथा इस कारोबार से जुडे लोग एक मार्च का इन्तजार कर रहे है, जबकि दोनों जिले में संचालित भट्टो पर पिछले तीन माह से कच्ची ईंट थपाई एवं गोल्टा में कच्ची ईंट की भराई जारी है। एनसीआर के नियम के तहत वर्ष 2026 में भी कुल 122 दिन ही भट्टों की चिमनी से धुआं निकलेंगा और जो धुआं 30 जून तक ही निकलेंगा। पहले ही टीटीजेड के नियम से भरतपुर शहर के निकट लगे भट्टे बन्द हो गए, जों भरतपुर जिले के उपखण्ड वैर, नदबई, भुसावर तथा डीग जिले के नगर, कुम्हेर, पहाडी में करीब 300 से अधिक भट्टे संचालित थे, जिनमें से एनसीआर के नियम कठोर होने के कारण वर्ष 2000 से आज तक 190 से अधिक भट्टे बन्द हो गए। वर्तमान में 100 से 120 भट्टे संचालित होने का अनुमान है।
- कहां.कहां संचालित है भट्टे
भरतपुर-डीग जिले के उपखण्ड वैर, भुसावर, नदबई एवं डीग जिले के नगर, पहाडी, जनूथर तथा पडौसी जिले अलवर के उपखण्ड कठूमर, लक्ष्मणगढ, दौसा जिले के महवा, मण्डावर और करौली जिले के टोडाभीम में करीब 250 भट्टे संचालित है। भरतपुर जिले के गांव हलैना, सरसैना, इरनियां, जहानपुर, बेरी, रामनगर, नसवारां, हन्तरा, अरौदा, भदीरा, नामखेडा, बुढवारी, करीली, खटोटी, रोनिजा, कबई, कटारा, नदबई, झोरोल, लुहासा, खांगरी, पाली, नामखेडा आदि गांवों पर संचालित है।
- ढाई दशक में 200 भट्टे हुए बन्द
ईंट भट्टा संचालक चंचल जिन्दल, सन्तोष चौधरी, अनिल सैनी ने बताया कि भरतपुर जिला एनसीआर क्षेत्र में आता है। भरतपुर-डीग जिले के वैर, नदबई, भुसावर व नगर उपखण्ड क्षेत्र में ही ये भट्टे संचालित है। जहां ये भट्टे लगे हुए है, वहां से दिल्ली की दूरी करीब 250 किमी है और ताज महल की दूरी करीब 75 किमी है। टीटीजेड क्षेत्र की सीमा नदबई के गांव डहरा मोड तक आती है। जहां एनसीआर के नियम लागू नही होते है, वहां ईंट भट्टें की चिमनी से धुआं एक जनवरी से निकलाना शुरू हो जाता है। जबकि भरतपुर जिले में 1 मार्च से भट्टे की चिमनी से धुआं निलकता है और ये भट्टे चालू होते है। ऐसा होने से भरतपुर जिले को ईंट भट्टा कारोबार चैपट हो गया। एनसीआर नियम से जिले मे वर्ष 2000 से 2026 तक करीब 200 ईंट भट्टे बन्द हो गए। वर्ष 2022 में 55, वर्ष 2023 में 43 तथा वर्ष 2024 में 21, वर्ष 2025 में 18 भट्टे बन्द हुए। साल 2026 में भी कई भट्टे बन्द हो सकते हे।
- एनसीआर से निकले तो सस्ती मिले ईंट
ईंट भट्टा मालिक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष सन्तोष चौधरी व पंकज बिजवारी ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में भरतपुर जिले का आना और कठोर नियम के कारण जिले का उद्योग धन्घा चौपट हो गया। जिले के अनेक उद्योग बन्द हो गए। अब ईंट उद्योग धन्घा भी बन्द के कगार पर है। यदि भरतपुर जिले के उपखण्ड वैर, भुसावर, नदबई, नगर आदि एनसीआर क्षेत्र के निकले और राजस्थान प्रान्त में एक साथ ईंट भट्टों की जलाई शुरू हो, तभी ईंट सस्ती होगी और ईंट भट्टा कारोबार प्रगति करेगा। ऐसा होने से लोगों को रोजगार भी प्राप्त होंगे।
- कहां से आते श्रमिक
ईंट भट्टा संचालक चंचल अग्रवाल हलैना वाले एवं अनिल सैनी हन्तरा ने बताया कि ईंट भट्टों पर कार्य करने को स्थानीय एवं राजस्थान के कई जिले सहित उत्तरप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखण्ड, दिल्ली, गुजराज, पंजाब आदि प्रान्तों से श्रमिक आते आते है। जो ईंट थपाई, ईंट जलाई, ईंट निकासी आदि के कार्य करते है। श्रमिकों को लाते वक्त उन्हे एडवांस में पैसा दिया जाता है और जब ये लौटते हैएउस वक्त कार्य के हिसाब से पैसा की लेनदेन करते है। साथ आगामी साल को भी एडवांस पैसा दिया जाता है। जिससे ये समय पर आ जाए और कार्य शुरू कर दे।
- पेट की खातिर छोड आए गांव-घर
उत्तरप्रदेश प्रान्त के एटा जिले के गांव मदनपुरा निवासी रामपाल जाटव ने बताया कि 7 से 8 महिना को पेट की खातिर गांव और घर को छोड आते है। भट्टो का संचालक भले ही शुरू नही हुआ, लेकिन ईंट की थपाई जारी है। भट्टे का मालिक हमे 20 से 30 हजार की राशि एंडवासं में देते है और कृष्ण व शुक्ल पक्ष की चौदस को थपाई की गई ईंट्टों के हिसाव से 75 प्रतिशत राशि खर्चा को देते हैं। हरियाणा प्रान्त के पलवल जिले के गांव दीघौठ निवासी चन्द्रकला ने बताया कि दीघौठ निवासी चन्द्रकला ने बताया कि दशहरा पर्व पर ईंट थपाई को परिवार सहित आते है। भरतपुर जिले में अभी भट्टों की चिमनी से धुआं नही निकला है, जो धुआं एक मार्च को निकलेगा।


