आस्था से भरपूर श्री लटूरियां हनुमान आश्रम परिवार के प्रेम और एकता का महत्व सिखाता राम भरत मिलाप; सन्त समागम एवं भण्डारा 7 को
भरतपुर( विष्णु मित्तल) श्री लटूरियां हनुमान भक्त मण्डल एवं तपस्वी बाबा रामशरणदास महाराज के शिष्यों के द्वारा जयपुर नेशनल हाईवे सेवर.आगरा बाईपास राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे स्थित प्राचीन व आस्था से भरपूर श्री लटूरियां हनुमान आश्रम पर महन्त भानूदास महाराज एवं सन्त मनीरामदास महाराज के सानिध्य में आश्रम के तपस्वी व महन्त रहे 113 वर्षीय
सन्त रामशरणदास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि पर आयोजित हो रही रामकथा एवं रामलीला में भारी संख्या में सन्त और श्रद्वालु उमड़ रहे हैं , जो कर विश्वशान्ति, ए देश व समाज के उत्थानए मानव व परिवार कल्याण की कामनाएं
क्र रामकथा,रामलीला एवं रासलीला आदि का आनन्द लेकर देव प्रतिमा एवं सन्त दर्शन कर रहे है,जिससे आश्रम भक्तिमय बना हुआ है। श्रीमद भागवत विद्यापीठ अयोध्या के आचार्य एवं कथा वाचक तुलसीदास नव्य न्यायाचार्य ने भगवान ने भगवान श्रीराम की बाल लीला,सीताराम विवाह,राम वनवास,केवट प्रसंग,दशरथजी का प्रेम,भरत चरित्र और श्रीराम-भरत संवाद आदि कथाए सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम-भरत मिलाप निःस्वार्थ प्रेम की कथा है,ये हमें परिवार के प्रेम और एकता का महत्व का ज्ञान देती है और साथ ही धर्म के मार्ग पर चलने के प्रेरणा देती है। उन्होने कहा कि हमें कलियुग का मुकाबला करने के लिए भगवान श्रीराम का गुणगान और जाप कर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और हमेशा सत्य का साथ देकर असत्य का त्याग करना चाहिए।
लटूरियां हनुमान आश्रम के महन्त भानूदास महाराज एवं मनीरामदास महाराज ने बताया कि तपस्वी बाबा रामशरणदास महाराज की 29वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 26 फरवरी से श्रीराम कथाए रामलीला एवं सन्त दर्शन आदि कार्यक्रम हो रहे हैं जो 7 मार्च तक जारी रहेंगे। 6 मार्च को श्रीराम कथा एवं रामलीला का समापन होगा और 7 मार्च को सन्त समागमए श्रीराम यज्ञ एवं भण्डारा होगा। इसी दिन आश्रम के सन्त मनीरामदास महाराज को महन्त की उपाधि प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में भरतपुर शहर एवं आश्रम के निकटवर्ती गांवों सहित उत्तर प्रदेशए उत्तराखण्डए हरियाणाए मध्य प्रदेशए दिल्लीए महाराष्ट्रए पंजाबए गुजरात आदि राज्यों के सन्त और श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। संत समागम में हिमालय के महामंडलेश्वर अभिरामदास एवं अयोध्या के महंत रामदास सहित अयोध्याए मथुराए वृन्दावनए चित्रकूटए पुष्करए जनकपुरीए बनारसए प्रयागराजए गोवर्धन आदि स्थानों के संत प्रवचन करेंगे।
- आस्था से भरपूर लटूरियां हनुमान आश्रम
भरतपुर शहर से करीब 5 किमी दूर गांव मल्लाह निकटवर्ती एवं सेवर.आगरा बाईपास राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे स्थित श्री लटूरियां हनुमान आश्रम करीब 250 वर्ष पुराना है,जो सर्वसमाज का आस्था से भरपूर है। ये सन्तों की तपोभूमि है,आज भी कई सन्त तपस्या कर रहे है। सन्त मनीरामदास महाराज बताते है कि लटूरियां शब्द का अर्थ है बाल या जटाएं। यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा के सिर पर बाल ;लटेंद्ध दिखाई देती हैं, जिसके कारण इन्हें लटूरियां वाले हनुमान कहा जाता है। यह स्वरूप हनुमान जी के बाल रूप और तपस्वी रूप का संगम माना जाता है। भरतपुर के महाराजा सूरजमल और उनके वंशज हनुमान जी के परम भक्त थे,जो दर्शन कर आते और भरतपुर के लोहागढ़ किले की सुरक्षा और रियासत की खुशहाली के लिए राजा अक्सर यहाँ माथा टेकने आते थे। युद्ध पर जाने से पहले विजय की कामना के लिए यहाँ विशेष पूजा की जाती थी। आश्रम के महन्त भानूदास महाराज ने बताया कि लटूरियां हनुमान जी के प्रति प्राचीन समय से श्रद्वालु एवं सन्तों की आस्था कायम है,जो श्रद्धालुओं के मन में गहरी श्रद्धा पैदा करती हैं। भक्तों का मानना है कि यहाँ मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है। हनुमान जी की प्रतिमा अत्यंत भव्य और आकर्षक है। सिंदूरी चोला चढ़े हुए हनुमान जी के दर्शन मात्र से मानसिक शांति मिलती है। आश्रम के भक्त सीताराम गुप्ता एवं हेमराज गोयल ने बताया कि आश्रम पर सन्त रामशरणदास महाराज ने तप किया,जिनका वर्ष 1998 में शरीर शान्त हो गया,जो 113 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थें। जिनकी पुण्यतिथि पर 1998 से आज तक प्रतिवर्ष धार्मिक कार्यक्रम और सन्त दर्शन आदि होते है।