मां गंगा के मायके ‘मुखबा गांव’ में आध्यात्मिक लहर: हिमालय की गोद में जगद्गुरु स्वामी बालकदेवाचार्य जी की गहन साधना जारी
खैरथल, (देवराज मीणा)उत्तराखंड के पवित्र हिमालयी क्षेत्र में स्थित और मां गंगा का मायका माने जाने वाले ऐतिहासिक मुखबा गांव में इन दिनों आध्यात्मिक आस्था और साधना का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मां गंगा की पावन धारा तथा हिमालय की दिव्य गोद में संतों और तपस्वियों की साधना देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
गंगा तट पर जगद्गुरु की दिव्य साधना: गंगोत्री धाम के समीप स्थित मुखबा गांव में रेणागिरी धाम के जगद्गुरु स्वामी बालकदेवाचार्य जी महाराज इन दिनों हिमालय की शांत वादियों और मां गंगा की पावन धारा के तट पर गंगा रज (मिट्टी) में गहन साधना में लीन हैं। चारों ओर बर्फ से ढकी गगनचुंबी पर्वत चोटियां, कल-कल नाद करती बहती भागीरथी नदी और मंत्रोच्चार से गुंजायमान आध्यात्मिक वातावरण उनकी इस तपस्या को और अधिक दिव्यता प्रदान कर रहा है। हिमालय की इस कड़कड़ाती ठंड में महाराज श्री की यह कठिन साधना क्षेत्र में कौतूहल और श्रद्धा का विषय बनी हुई है।
विशाल भंडारे और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन: स्वामी बालकदेवाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में मुखबा गांव में एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान में स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं सहित देश के कोने-कोने से उत्तराखंड पहुंचे तीर्थयात्री और भक्त बड़ी संख्या में प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब: मुखबा गांव पहुंच रहे श्रद्धालु न केवल प्राकृतिक और आध्यात्मिक सौंदर्य के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि महाराज जी के दर्शन कर उनका दिव्य आशीर्वाद भी प्राप्त कर रहे हैं। इस दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और महाआरती में सहभागी बनकर भक्तगण आत्मिक शांति की अनुभूति कर रहे हैं।


