खैरथल में महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर शनिवार को खैरथल शहर भक्ति, उत्साह और सामाजिक जागरूकता के रंग में रंगा नजर आया
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) खैरथल में महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर शनिवार को खैरथल शहर भक्ति, उत्साह और सामाजिक जागरूकता के रंग में रंगा नजर आया।
जिला सैनी महासभा खैरथल के देखरेख में खैरथल के शिवचरण गार्डन में आयोजित भव्य समारोह में हजारों लोगों की भागीदारी रही। जिला सैनी महासभा खैरथल के देखरेख में खैरथल के शिवचरण गार्डन में आयोजित भव्य समारोह में हजारों लोगों की भागीदारी रही।
जिलाध्यक्ष तेजाराम सैनी और एडवोकेट मुकेश सैनी ने बताया कि जयंती पर अंबेडकर सर्किल से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंची। शोभायात्रा में भगवान गणेश, शिव-पार्व ती, रामदरबार, बजरंगबली, राधा-कृष्ण के साथ सावित्रीबाई फुले और महात्मा फुले की प्रेरणादायक झांकियां शामिल रहीं।
बेटियों की शिक्षा का संदेश देती झांकी विशेष रही
बेटियों की शिक्षा का संदेश देती झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
भपंग वादकों की थाप और पारंपरिक नृत्य ने माहौल को जीवंत बना दिया।
जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया और राहगीरों के लिए मीठे पानी की छबील लगाई गई।
शोभायात्रा के साथ बाइक और कार रैली ने आयोजन को और भव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम में हरियाणवी और राजस्थानी लोक नृत्य, झांकी नृत्य तथा स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर ऑल इंडियासैनी सेवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलबाग सिंह सैनी मुख्य अतिथि रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष तेजाराम सैनी ने की। समारोह में 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, कलाकारों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया।
'समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ जो अलख जगाई'
मुख्य अतिथि दिलबाग सिंह सैनी ने कहा, “महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ जो अलख जगाई, वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान पहुंचाने का काम किया। हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना होगा।"
अध्यक्षता कर रहे तेजाराम सैनी ने कहा, “फुले जी का जीवन हमें सिखाता है कि संगठित समाज ही प्रगति कर सकता है। आज जरूरत है कि हम शिक्षा, समानता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ें।"
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

