बारिश से खराब हो रही प्याज की पौध, किसान बोले-कर्ज लेकर लगाई थी प्याज, लागत निकलना मुश्किल

Aug 29, 2025 - 13:03
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बारिश से खराब हो रही प्याज की पौध, किसान बोले-कर्ज लेकर लगाई थी प्याज, लागत निकलना मुश्किल

  खैरथल (हीरालाल भूरानी) 

         राजस्थान में प्याज उत्पादन में सीकर और खखैरथल-तिजारा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। जहां सीकर का नाम मीठी प्याज के साथ जुड़ा है, तो वहीं खैरथल-तिजारा का नाम तीखी (लाल प्याज) प्याज के लिए प्रसिद्ध है। देशभर में खैरथल-तिजारा की लाल प्याज अपने तीखेपन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। यह जिला लाल प्याज की खेती के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। यहां पर प्याज की बुआई लगभग 5500 हैक्टेयर में की जाती है। पिछली बार प्याज की बुआई 5460 हैक्टेयर में हुई थी और इस वर्ष यह 10 से 15 प्रतिशत प्रतिशत प्याज की बुवाई बढ़ सकती है। क्योंकि पिछले वर्ष किसानों को प्याज की खेती में अच्छा मुनाफा हुआ था। हालांकि अभी प्याज की बुवाई 60 प्रतिशत ही पूर्ण हुई है, बाकी शेष है। अगर आने वाले समय में वर्षा वाले दिनों की संख्या अधिक रहेगी तो प्याज की बुवाई गत वर्ष के समान ही रहेगी। आने वाले समय में सूखे दिनों की संख्या अधिक रहेगी तो प्याज की बुवाई में वृद्धि होगी। किसानों द्वारा अगस्त माह की शुरुआत में मौसम सूखा होने के साथ ही प्याज की बुवाई शुरू कर दी थी। बुवाई के कुछ दिन बाद अब लगातार बारिश हो रही है। जिससे प्याज की पौध खराब हो रही है। वहीं अधिक बारिश के कारण प्याज में रोग लगने की भी संभावना बनी हुई है।

एक बीघा में आती है 25 से 30 हजार की लागत, रोग लगने का खतरा
      किसान फजरू मेव, देवेन्द्र दहिया, हुकम सिंह ने बताया कि आधे से ज्यादा किसानों द्वारा प्याज की बुवाई की जा चुकी है। जो किसान बुवाई नहीं कर सके वे मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ज्यादा बारिश के कारण मेढ़ से मिट्टी बह गई है। वहीं कुछ खेतों में पानी के बहाव के कारण प्याज की पौध ही बह गई है। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। मौसम खुले तो मेढ़ पर मिट्टी लगवाएंगे, ताकि कुछ तो प्याज बनी रहे। वहीं प्याज की फालर भी पीली-पीली लगी है। लगातार बारिश से फालर में रोग लग जाता है। इससे भी काफी खर्चा बढ़ गया। इस बार एक बीधा प्याज लगाने में लगभग 25 से 30 हजार रूपये का खर्चा आ रहा है। साहूकारों से पैसे उधार लेकर लगाई थी प्याज मगर अब लगता है प्याज की लागत निकालना भी मुश्किल होगा। लगातार बारिश से जो प्याज की पौध ठीक है, उनमें भी रोग लगने की प्रबल संभावना है।

एक्सपर्ट व्यू  -
        सहायक कृषि अधिकारी महेश खेरिया ने बताया कि लगातार हो रही वर्षा और वातावरण में नमी के कारण प्याज की फसल में एंथेक्नोज/ट्विस्टर ब्लाइट (पत्ती मरोड़ विकृति) और कंद सड़न बीमारी का संयुक्त रूप से प्रकोप हो सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि मौसम खुलते ही प्याज की फसल में छिड़काव अवश्य करें। मैंकोजेब 75% WP का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी, कॉपर ऑक्सीक्लोराइट 50% WP का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी, काबेंडाजिम 12% WP + मैकोजेब 63% WP का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी, एजोक्सट्रॉबिन 11% टैबूकोनाजोल 18.3% SC का 1 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी... इनमें से किसी भी एक का छिड़काव किया जाए तो प्याज की फसल में फायदा होगा। - साथ ही खेत में उचित जल निकास की व्यवस्था करें, जिससे कीट रोगों से प्याज को बचाया जा सके। अधिक वर्षा और जल भराव के कारण मेढ़ से बही मिट्टी को नमी के सूख जाने पर फिर से लगाएं।

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