रामबास में गंदे पानी का सड़क पर कब्जा शिकायतों के अंबार पर बैठा है बेपरवाह प्रशासन
अलवर जिले की गोविंदगढ़ नगरपालिका के रामबास इलाके में प्रशासनिक संवेदनहीनता अब जानलेवा साबित होने लगी है। महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के पास पिछले 7-8 महीनों से जमा गंदा पानी आज एक बड़े हादसे का सबब बनते-बनते रह गया। यहाँ मुख्य रास्ते पर बने 'मिनी जोहड़' में संतुलन बिगड़ने से एक पानी का टैंकर बीच सड़क पर पलट गया। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते नीचे कूदकर अपनी जान बचाई, वरना परिणाम घातक हो सकते थे।
नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन को लिखित ओर मौखिक कई बार अवगत कराया गया।अधिकारी मौके पर 'पिकनिक' की तरह मुआयना करने आते हैं फोटो खींचते हैं और चले जाते हैं। आज तक पानी निकासी के लिए कोई ठोस योजना धरातल पर नहीं उतरी।
- 7 महीने से नरक में ग्रामीण, प्रशासन कुंभकर्णी नींद में
रामबास की मुख्य सड़क आज किसी तालाब से कम नज़र नहीं आती। स्थानीय निवासी ग्यारसा सैनी और अन्य कॉलोनी वासियों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों और राहगीरों के लिए मुसीबत का जाल बन चुका है। बदबू और मच्छरों के कारण पूरा इलाका बीमारियों की चपेट में आने की कगार पर है, लेकिन नगर पालिका के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही।
हरीश भारद्वाज ने बताया कि क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है आज तो चालक बच गया लेकिन कल अगर कोई स्कूल ही बच्चा इस गंदे पानी में समा गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
आज सुबह हुआ यह टैंकर हादसा प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जिस रास्ते से हर दिन सैकड़ों नौनिहाल स्कूल जाते हैं वहां महीनों से गंदा पानी जमा रहना न केवल लापरवाही है बल्कि जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ है।


