मकराना क्षेत्र में शिकारियों का तांडव: जहरीला दाना देकर 20-25 राष्ट्रीय पक्षी मोरों की निर्मम हत्या, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' की अवैध कटाई और वन्यजीवों की तस्करी से पर्यावरण प्रेमी चिंतित, SDM व थानाधिकारी को सौंपी शिकायत
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। मकराना तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गेहडा कलाँ के राजस्व गाँव गेहडा खुर्द में शिकारियों द्वारा क्रूरता की सारी हदें पार करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ गत 19 मई 2026 को कुछ अज्ञात व नामजद वनबागरियों (शिकारियों) द्वारा जहरीला दाना देकर करीब 20 से 25 राष्ट्रीय पक्षी मोरों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत प्रशासन और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने उप मंडल मजिस्ट्रेट मकराना और थाना अधिकारी गच्छीपुरा को लिखित शिकायत सौंपकर सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की है। गच्छीपुरा थानाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्राम पंचायत गेहडा कलाँ के प्रशासक मुकेश डारा सहित स्थानीय ग्रामीणों ने सोनू, नाथू, और रुड़ाराम नामक वनबागरियों को नामजद करते हुए बताया कि इन लोगों ने क्षेत्र में आतंक मचा रखा है। ये शिकारी आए दिन वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ये शिकारी गाँवों और खेतों में टोपीदार बंदूकें लेकर सरेआम घूमते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीण इनके डर से खुलकर नाम बताने से भी कतराते हैं।
उपखण्ड अधिकारी एसडीएम मकराना को सौंपे गए ज्ञापन में पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि वनबागरियों ने क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों जैसे ईटावा बामणिया, ईटावा लाखा, गेढा कलाँ, दम्बोई खुर्द, भीया कलाँ, अल्तवा, मिधियान, खारड़िया, नून्दडा, रानीगांव आदि की गोचर भूमियों और तालाबों के पास अवैध रूप से डेरे जमा रखे हैं। कुछ स्थानीय लोग भी खेती की रखवाली के बहाने इन्हें शरण दे रहे हैं। इसकी आड़ में ये शिकारी मोरों के अलावा चिंकारा, खरगोश, नीलगाय आदि वन्यजीवों का अवैध शिकार और तस्करी कर रहे हैं। इससे पूर्व 9 मई 2026 को भी इसी तरह जहरीला दाना देकर मोरों को मारा गया था।शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि मकराना और परबतसर विधानसभा क्षेत्र में अवैध आरा मशीनें लगाकर राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन तस्करों पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में खेजड़ी का नामोनिशान मिट जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस में शिकायत करने पर वे वन विभाग के पास भेजते हैं, और वन विभाग वाले इसे राजस्व विभाग का काम बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वर्ष 2018 में भी ग्राम नून्दडा में इसी तरह 50 से 60 मोरों को जहर देकर मार दिया गया था। गच्छीपुरा हलका क्षेत्र में वन विभाग की चौकी व रेस्क्यू सेंटर बनाने की माँग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन पूर्व में सरपंच पुष्पा विश्नोई द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासक मुकेश डारा, छोटूराम, हरजीराम, खेमाराम, राकेश, दिनेश, गिरधारी, सुनील, कानाराम सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में तहसीलदार, ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी, थानाधिकारी और वन विभाग के रेंजर अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाकर शिकारियों और खेजड़ी तस्करों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाए और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।


