टीटीज़ेड क्षेत्र में उद्योगों पर लगी रोक हटाने हेतु लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से की मुलाकात
भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर जिले में टीटीज़ेड (Taj Trapezium Zone) क्षेत्र के अंतर्गत उद्योगों पर लंबे समय से लगी रोक एवं उससे उत्पन्न औद्योगिक समस्याओं के समाधान हेतु लघु उद्योग भारती के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता Ashwini Upadhyay से शिष्टाचार मुलाकात कर विस्तारपूर्वक चर्चा की।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिवक्ता महोदय को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते टीटीज़ेड क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना एवं पुरानी इकाइयों के विस्तार पर लंबे समय से प्रतिबंध लागू है। इस कारण भरतपुर जिले के औद्योगिक विकास, निवेश एवं रोजगार के अवसरों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
लघु उद्योग भारती के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य संजय चौधरी ने बताया कि वर्तमान समय में भरतपुर जिले के उद्योगों को टीटीज़ेड नियमों के कारण अनेक प्रशासनिक, तकनीकी एवं विकासात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज उद्योग जगत आधुनिक तकनीक, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन करने में सक्षम है, इसके बावजूद उद्योगों के विस्तार एवं नई इकाइयों की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना उद्योग क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
बयाना इकाई के अध्यक्ष नितिन सिंघल ने बताया कि भरतपुर जिले का लगभग 80 किलोमीटर तक का क्षेत्र टीटीज़ेड में शामिल किया गया है, जबकि ताजमहल के अधिक निकट स्थित कई क्षेत्रों को टीटीज़ेड से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की असमानता के कारण भरतपुर जिले के उद्योगों एवं व्यापारिक गतिविधियों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए टीटीज़ेड क्षेत्र की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष पुनर्समीक्षा कराई जाए।
भरतपुर इकाई के सचिव राहुल बंसल ने कहा कि टीटीज़ेड से संबंधित वायु प्रदूषण का सर्वे लगभग 30 वर्ष पूर्व किया गया था। वर्तमान समय में तकनीकी एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों में व्यापक परिवर्तन आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भरतपुर जिले का AQI सामान्यतः लगभग 120 के आसपास रहता है, जो अत्यधिक प्रदूषित श्रेणी में नहीं माना जाता। ऐसे में आधुनिक वैज्ञानिक आंकड़ों एवं नवीन पर्यावरणीय अध्ययन के आधार पर पुनः सर्वे कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि भरतपुर क्षेत्र में उद्योगों के विकास रुकने से युवाओं के रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं तथा स्थानीय निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यदि टीटीज़ेड क्षेत्र की व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक पुनर्समीक्षा कर उचित समाधान निकाला जाए तो क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है तथा हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना तथा विषय पर विस्तृत कानूनी एवं संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि टीटीज़ेड से संबंधित सभी तथ्य, पर्यावरणीय आंकड़े, वैज्ञानिक रिपोर्ट एवं कानूनी बिंदुओं को संकलित कर एक विस्तृत प्रलेखन तैयार किया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में प्रभावी परिवाद प्रस्तुत कर क्षेत्र के उद्योगों को राहत दिलाने हेतु उचित कानूनी कार्यवाही की जा सके।
प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि न्यायालय एवं सरकार के समक्ष तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर भरतपुर जिले के उद्योगों एवं व्यापार जगत को भविष्य में राहत मिल सकेगी तथा क्षेत्र के समग्र औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रतिनिधि मंडल मैं लघु उद्योग भारती के जयपुर प्रांत कार्यकारिणी सदस्य संजय चौधरी , बयाना इकाई के अध्यक्ष नितिन सिंघल , भरतपुर इकाई के सचिव राहुल बंसल आदि थे


