सियासी खींचतान में 'बंधक' बनी पोसालिया ग्राम पंचायत; 3 माह से विकास ठप, विद्यार्थियों का भविष्य अधर में
सिरोही | रमेश सुथार
सिरोही जिले की पोसालिया ग्राम पंचायत पिछले तीन महीनों से राजनीतिक रस्साकशी और प्रशासनिक उदासीनता का केंद्र बनी हुई है। आलम यह है कि पंचायत में प्रभावी नेतृत्व (प्रशासक) की नियुक्ति और चार्ज के विवाद ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद अब तक प्रशासक को चार्ज न दिया जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विद्यार्थी और मजदूर हो रहे परेशान
पीजी महाविद्यालय सिरोही के छात्र नेता भानु प्रताप सिंह पोसालिया ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पंचायत की इस स्थिति का सबसे बुरा असर छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न होने के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक कार्य रुके हुए हैं। वहीं गरीब, मजदूर और किसान अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए पंचायत के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं।
चरमराई सफाई और रुके विकास कार्य
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत बिना मुखिया के चल रही है। गांव की ममता कुंवर राव ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक पोसालिया की जनता राजनीति की बलि चढ़ती रहेगी? गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और विकास के नाम पर एक पत्थर भी नहीं हिला है। स्कूली छात्र कीर्तन पाल सिंह ने दो टूक कहा— "हमें राजनीति नहीं, समाधान चाहिए। गांव को संघर्ष नहीं, सुशासन चाहिए।"
मंत्री से लेकर कलेक्टर तक गुहार, पर नतीजा शून्य
जानकारी के अनुसार, प्रशासक प्रतिनिधि और स्वयं प्रशासक ने दर्जनों बार जिला कलेक्टर से मुलाकात कर समाधान की मांग की है। इतना ही नहीं, राज्य मंत्री ओटा राम देवासी को भी दो बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। जिला प्रशासन का राज्य स्तर से मार्गदर्शन न मिलने का बहाना बनाना ग्रामीणों की समझ से परे है।


