स्टाम्प वेंडरों और ई-मित्र धारकों द्वारा अवैध वसूली और फर्जी नोटेरी का खेल, 15 दिन में सुधार नहीं होने पर होगी कानूनी कार्रवाई
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। स्थानीय ताल्लुका विधिक सेवा समिति के पैनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने मकराना क्षेत्र में स्टाम्प वेंडरों और ई-मित्र धारकों द्वारा आम जनता के साथ की जा रही लूटखसूट, अवैध वसूली और फर्जीवाड़े को लेकर गहरा रोष प्रकट किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में इन्होंने अपने कामकाज के तरीकों में सुधार नहीं किया, तो जिला कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार सहित उच्च प्रशासन को शिकायत कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने बताया कि मकराना में पिछले कुछ महीनों से स्टाम्प वेंडरों और ई-मित्र धारकों द्वारा नोटेरी तस्दीक के नाम पर आम जनता से तय फीस से 200 से 300 रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई वेंडर और ई-मित्र धारक कानून को ताक पर रखकर खुद ही नोटेरी की फर्जी सीलें (मोहर) बनाकर दस्तावेजों पर लगा रहे हैं, जो कि एक गंभीर अपराध है।
उन्होंने बताया कि स्टाम्प वेंडर आम जनता को खाली स्टाम्प देने से साफ मना कर देते हैं। वे ग्राहकों पर दबाव बनाते हैं कि लिखापढ़ी भी उन्हीं से करवानी होगी, तभी स्टाम्प मिलेगा। जब जनता किसी अधिवक्ता का नाम लेती है, तो वेंडर यह कहकर गुमराह करते हैं कि "अधिवक्ता आपसे दो-तीन हजार रुपये ले लेंगे, हम कम में कर देंगे।" कानूनी जानकारी न होने के बावजूद ये वेंडर गलत लिखापढ़ी कर देते हैं, जिसका खामियाजा बाद में आम जनता को कोर्ट-कचहरी और थानों के चक्कर लगाकर भुगतना पड़ता है।
अधिवक्ता हनीफी ने स्पष्ट किया कि ज्यादातर अधिवक्ता पूरी तरह कानूनी रूप से अपने कार्यालयों में ही लिखापढ़ी का कार्य करते हैं। आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए ताल्लुका विधिक सेवा समिति सदैव तत्पर है। यदि किसी भी नागरिक के साथ इस प्रकार का अन्याय या धोखाधड़ी होती है, तो समिति उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
तलत हुसैन हनीफी (पैनल अधिवक्ता, ताल्लुका विधिक सेवा समिति, मकराना ने "आमजन से अपील है कि किसी भी स्टाम्प वेंडर या ई-मित्र धारक से नोटेरी की सील न लगवाएं, वह फर्जी हो सकती है। नोटेरी हमेशा न्यायालय परिसर या अधिकृत नोटेरी पब्लिक के कार्यालय में जाकर ही करवाएं, अन्यथा आप धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।"


