'ऑपरेशन बचपन': उदयपुर से सूरत तस्करी किए गए 90 बाल श्रमिक आजाद; साड़ियों में धागा पिरोने और मजदूरी के मिलते थे चंद रुपए

May 13, 2026 - 16:24
May 13, 2026 - 23:46
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'ऑपरेशन बचपन': उदयपुर से सूरत तस्करी किए गए 90 बाल श्रमिक आजाद; साड़ियों में धागा पिरोने और मजदूरी के मिलते थे चंद रुपए

उदयपुर/ सूरत 

राजस्थान के उदयपुर जिले के आदिवासी अंचलों से तस्करी कर गुजरात ले जाए गए 90 बच्चों के बचपन को बुधवार को नई जिंदगी मिली। उदयपुर की मानव तस्करी निरोधी यूनिट (AHTU) और राज्य बाल आयोग की टीम ने सूरत के कपड़ा बाजार में संयुक्त कार्रवाई करते हुए इन मासूमों को नरकीय जीवन से मुक्त करवाया। रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र महज 7 से 14 साल के बीच है।

5 हजार की खातिर 'गुलाम' बना बचपन

सूरत के पूना थाना इलाके की सीताराम सोसाइटी और मुक्तिधाम सोसाइटी सहित छह अलग-अलग ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ये बच्चे टेक्सटाइल मार्केट की छोटी यूनिट्स में काम कर रहे थे।

  • काम का स्वरूप: कुछ बच्चे साड़ियों में धागा वर्क कर रहे थे, तो कुछ अपनी उम्र से बड़ी मशीनें चलाने को मजबूर थे।

  • वेतन: इन मासूमों को दिन-रात की हाड़तोड़ मेहनत के बदले महीने के मात्र 5 से 8 हजार रुपए दिए जा रहे थे।

स्कूल की जगह फैक्ट्रियों में पहुंचे 'ड्रॉपआउट' बच्चे

जांच में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए अधिकांश बच्चे स्कूलों से 'ड्रॉपआउट' हैं। गरीबी और अभाव के चलते बिचौलियों ने इन बच्चों को अच्छी कमाई का लालच देकर सूरत की फैक्ट्रियों में धकेल दिया। कुछ बच्चे तो चंद महीने पहले ही वहां पहुंचे थे।

एक महीने की प्लानिंग और सिलसिलेवार छापेमारी

राज्य बाल आयोग के पूर्व सदस्य शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि पिछले एक महीने से सूचना मिल रही थी कि उदयपुर के आदिवासी क्षेत्रों से बच्चों को मजदूरी के लिए सूरत ले जाया जा रहा है।

"हमने 20 लोगों की विशेष टीम तैयार की और बुधवार को योजनाबद्ध तरीके से एक साथ कई ठिकानों पर रेड मारी। बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया है और अब उनके परिजनों व फैक्ट्री संचालकों से गहन पूछताछ की जा रही है।" — शैलेन्द्र पंड्या, पूर्व सदस्य, राज्य बाल आयोग

पुरानी रंजिश और पुराना पैटर्न

यह पहली बार नहीं है जब सूरत में उदयपुर के बच्चे मिले हैं। बाल आयोग ने 2019 में भी इसी तरह की बड़ी कार्रवाई कर कई बच्चों को मुक्त करवाया था, जो सभी उदयपुर के ही रहने वाले थे। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि बाल तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क आज भी सक्रिय है।


आगे की कार्रवाई: पुलिस और बाल कल्याण समिति अब इन बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें वापस उनके घरों तक पहुंचाने और शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगी। साथ ही, बच्चों को भेजने वाले दलालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

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