केंद्रीय कर्मचारियों की लगी लॉटरी! अब घर बनाना होगा बेहद सस्ता
दिल्ली (कमलेश जैन) केंद्र सरकार ने अपने लाखों कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी देते हुए एक राहत भरा फैसला लिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) की ब्याज दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी न करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इसे पिछले साल की तरह 7.10 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा है। इस फैसले से उन कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा जो नया घर खरीदने या अपने सपनों का आशियाना बनाने की योजना बना रहे हैं।
1 अप्रैल से लागू हों गए नए आदेश
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, यह नई ब्याज दर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। और 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। इसका मतलब है कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान सरकारी कर्मचारी इसी किफायती दर पर लोन का लाभ उठा सकेंगे। मानना है कि इस फैसले से उन लाखों परिवारों को मदद मिलेगी जो महंगाई के दौर में घर बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
आखिर क्या है हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA)?
यह हाउस बिल्डिंग एडवांस केंद्र सरकार की एक विशेष योजना है। इसके तहत कर्मचारियों को घर खरीदने, प्लॉट पर मकान बनाने या अपने पुराने घर की मरम्मत (Renovation) के लिए एडवांस के रूप में ऋण दिया जाता है। चूंकि यह सरकारी सुविधा है, इसलिए इसकी ब्याज दरें और शर्तें किसी भी कमर्शियल बैंक के मुकाबले काफी आसान और सस्ती होती हैं।
बैंक लोन के मुकाबले जबरदस्त बचत
वर्तमान में जहां ज्यादातर प्राइवेट और सरकारी बैंक होम लोन पर 8 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज वसूल रहे हैं, वहीं सरकार का 7.10 प्रतिशत का ऑफर किसी सौगात से कम नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरें न बढ़ने से कर्मचारियों की ईएमआई (EMI) पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। मध्यम आय वर्ग के सरकारी कर्मचारियों के लिए यह अपने घर का सपना हकीकत में बदलने का सबसे सुनहरा मौका है।
वित्त मंत्रालय की मंजूरी
यह महत्वपूर्ण फैसला वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सरकार की मंशा है कि कर्मचारियों को सस्ती दरों पर आवास ऋण उपलब्ध कराया जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। सरकारी कर्मचारियों के बीच HBA अपनी आसान प्रक्रिया और कम कागजी कार्रवाई के कारण हमेशा से पहली पसंद रहा है। अब दरें स्थिर रहने से सरकार के प्रति कर्मचारियों का भरोसा और मजबूत होगा।


