वन खण्डी महादेव गौ शाला में 'गौ सेवा सम्मान समारोह' आयोजित; भामाशाहों और गौ रक्षकों का हुआ बहुमान
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता), अलवर जिले के रैणी उपखण्ड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम माचाड़ी में स्थित ऐतिहासिक वन खण्डी महादेव गौ शाला में एक भव्य 'गौ सेवा सम्मान समारोह' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गौ सेवा, गौ रक्षा और गौशाला संवर्धन में अनवरत योगदान देने वाले स्थानीय भामाशाहों, समाजसेवियों और गौ रक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों और गौ रक्षकों को गौ माता का स्मृति चिन्ह (प्रतीक चिन्ह) भेंट कर और दुपट्टा पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया गया।
अलवर जिले में तेज होगा 'गौ सम्मान हस्ताक्षर अभियान': समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य गौ रक्षक गोपेश दास ने उपस्थित जनसमुदाय को गौ रक्षा, गौ सेवा और उनके वैज्ञानिक पालन-पोषण में बढ़-चढ़कर योगदान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने अलवर जिले में चल रहे 'गौ सम्मान हस्ताक्षर अभियान' को और अधिक गति देने तथा इसे एक व्यापक जन अभियान बनाने की अपील की, ताकि गौ माता को समाज में उचित और सम्मानजनक स्थान मिल सके।
केंद्र सरकार से गौवंश के लिए कड़े कानून बनाने की मांग: कार्यक्रम के दौरान गौ रक्षक केदार नाथ ने गौवंश के स्थायी संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को अविलंब गौवंश को सामान्य 'पशु सूची' से बाहर निकालकर राष्ट्रीय स्तर की विशेष सूची में जगह देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि देश के राष्ट्रीय पशु 'शेर' और राष्ट्रीय पक्षी 'मोर' की तरह ही गौवंश की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भी बेहद कड़े व प्रभावी कानून बनाए जाएं।
गोबर और गोमूत्र का मूल्य निर्धारण करने का सुझाव: गौ रक्षक केदार नाथ ने आर्थिक स्वावलंबन का खाका पेश करते हुए कहा कि यदि सरकार किसानों और गौ पालकों के लिए गोमूत्र की कीमत 200 रुपये प्रति लीटर तथा गाय के गोबर की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय कर दे, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। मूल्य मिलने से कोई भी व्यक्ति गौवंश को लावारिस नहीं छोड़ेगा और इस व्यवस्था से गौवंश पूरी प्रामाणिकता के साथ पालित, रक्षित एवं पूरी तरह सुरक्षित हो सकेगा।
समारोह में ये रहे उपस्थित: इस पावन गौ सेवा समारोह के अवसर पर क्षेत्र के प्रबुद्ध समाज सेवी वीरेन्द्र दाधीच, रतन तिवारी, सावन कुमार, हेमंत मीना, दुष्यंत कुमार, नागपाल, यश, शंभू सहित आध्यात्मिक क्षेत्र से बाल संत रामकृष्ण दास, बालक दास, लट्ठा नाथ और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, गोपालक व प्रखर गौ रक्षक मौजूद रहे।


