हरि शेवा धाम में पुरुषोत्तम मास अनुष्ठानों की पूर्णाहुति 15 जून को; उमड़ेगा संतों का महाकुंभ, छप्पन भोग और महाआरती आज
भीलवाड़ा। (राजकुमार गोयल) हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में संतान सेवा समिति एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी महाराज के सान्निध्य में गत 17 मई से जारी पुरुषोत्तम मास के एक दिवसीय आध्यात्मिक व सेवा महाअनुष्ठान का भव्य समापन 15 जून, सोमवार को होगा। इस अवसर पर आश्रम में विशाल संत समागम, विष्णु यज्ञ पूर्णाहुति, रुद्राभिषेक, छप्पन भोग और भव्य गंगा आरती सहित कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी महाराज ने बताया कि समापन दिवस पर मौन अमावस्या के विशेष संयोग पर प्रातः 5 बजे देश की पवित्र नदियों के जल से निर्मित सरोवर में संतों के शाही स्नान के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसके बाद प्रातः 7 बजे यज्ञाचार्य पंडित रोशन शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विष्णु यज्ञ और हरि सिद्धेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक शुरू होगा, जिसकी पूर्णाहुति दोपहर 12:15 बजे अभिजीत मुहूर्त में होगी।
भीलवाड़ा में जुटेगा संतों का मेला सोमवार अपराह्न 3 बजे हनुमान चालीसा पाठ के बाद भव्य संत समागम आयोजित होगा। इसमें भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न अंचलों से आए शीर्ष संत-महंत शिरकत करेंगे। समागम में मुख्य रूप से श्रीमहंत लक्ष्मण दास त्यागी, महामंडलेश्वर बाबूगिरी महाराज, श्रीमहंत मोहन शरण शास्त्री, महंत बनवारी शरण (काठिया बाबा), डॉ. स्वामी निर्मल दास महाराज सहित शहर के सभी मंदिरों के पुजारी व संतवृंद मौजूद रहेंगे।
सात समंदर पार से आए श्रद्धालु, संतों ने दी संस्कार की सीख इस एक माह के दौरान देश-विदेश के विख्यात कथावाचकों ने ज्ञान की सरिता बहाई। हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने श्रीराम कथा, भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने भक्तमाल कथा, जबलपुर के स्वामी अशोकानंद महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा और काशी के डॉ. स्वामी निर्मल दास महाराज ने शिवमहापुराण कथा का रसपान कराया। इस दिव्य आयोजन का लाभ उठाने के लिए अमेरिका, स्पेन, आयरलैंड सहित मुंबई, सूरत, अहमदाबाद व राजस्थान के कई शहरों से हजारों श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचे।
आध्यात्म के साथ सेवा की अनूठी मिसाल आश्रम द्वारा पूरे महीने अखंड रामनाम संकीर्तन, प्रतिदिन गीता व दुर्गा सप्तशती पाठ, गौसेवा, ब्राह्मण सेवा और अन्नक्षेत्र चलाने के साथ-साथ कच्ची बस्तियों में वस्त्र, कंबल, भोजन व मालपुए का वितरण कर मानवता की सेवा की गई। यज्ञाचार्य के अनुसार, सोमवार को अमावस्या तर्पण और 33 कोटि देवी-देवताओं के पूजन के साथ भगवान को 33 प्रकार के व्यंजनों व छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पण किया जाएगा। शाम को भव्य गंगा आरती और रामधुनी विश्राम के साथ इस ऐतिहासिक पुरुषोत्तम मास अनुष्ठान की पूर्णाहूति होगी।


