केंद्रीय विद्यालयों में अब विद्यार्थी संस्कृत पढ़ेंगे, 6वीं और 9वीं क्लास में अनिवार्य

Jun 16, 2026 - 20:10
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केंद्रीय विद्यालयों में अब विद्यार्थी संस्कृत पढ़ेंगे, 6वीं और 9वीं क्लास में अनिवार्य

दिल्ली (कमलेश जैन) केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में अब स्टूडेंट्स को संस्कृत पढ़नी होगी। इसके लिए 6वीं और 9वीं क्लास में अनिवार्य रूप से संस्कृत का एक सेक्शन बनेगा। हालांकि इस सेक्शन में संस्कृत के साथ ही क्षेत्रीय भाषा चुनने का विकल्प भी मौजूद होगा, लेकिन इसे संस्कृत सेक्शन के तौर पर पहचाना जाएगा। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्टूडेंट्स को थ्री लैंग्वेज पढ़ने के लिए ऑप्शन देने के तहत ये फैसला लिया गया है। इस संबंध में KVS मुख्यालय की तरफ से स्कूलों के लिए सर्कुलर जारी कर दिया गया है। ये बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा।
जिसके तहत स्कूल प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि वे ‘समागम पोर्टल’ पर स्टूडेंट्स की तरफ से चुनी गई तीसरी भाषा का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करें। वहीं स्कूल प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि स्टूडेंट्स को भाषा चयन की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी, जिससे वह अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार निर्णय ले सकें।
हिंदी और अंग्रेजी के साथ संस्कृत व क्षेत्रीय भाषा
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में तीन भाषाओं को लागू किया जा रहा है, जिसके तहत पहली और दूसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी। वहीं तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत या संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल क्षेत्रीय भाषा पढ़ाई जाएंगी। तीसरी भाषा के तौर पर स्टूडेंट्स संस्कृत व क्षेत्रीय भाषा में से किसी एक चयन करना होगा। स्टूडेंट्स को भाषा चयन में पूरी स्वतंत्रता मिलेगी।
संस्कृत का सेक्शन इस वजह से होगा अनिवार्य
केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत व क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। बेशक, इससे चुनने की स्वतंत्रता स्टूडेंट्स को मिलेगी, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों में अनिवार्य रूप से संस्कृत का एक सेक्शन बनाया जाएगा। ये फैसला ट्रांसफर होकर आने वाले कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षणिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।  ट्रांसफर होकर आने वाले कर्मचारियों के बच्चों को एडमिशन लेने पर संंस्कृत पढ़ने का मौका मिलेगा। कई बच्चे ऐसी जगह से ट्रांसफर होकर आंएगे, जहां संस्कृत पढ़ाई जा रही थी‌ ऐसे में क्लास का संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगा।
अलग-अलग बैच बनेंगे
वहीं सर्कुलर में ये भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों को स्टूडेंट्स की संख्या के हिसाब से अलग-अलग बैच बनाने होंगे। ये बैच संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं में स्टूडेंट्स की संख्या के आधार पर बनेंगे। जिन भी स्कूलों में सिर्फ एक सेक्शन है, उन स्कूलों में संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के अलग-अलग बैच बनाए जाएंगे। इसी तरह एक से अधिक सेक्शन वाले स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या के आधार पर दोनों भाषाओं के सेक्शन बनाए जाएंगे।

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