अलवर में बड़ा हादसा टला: दाऊदपुर में 45 साल पुरानी पानी की टंकी का ऊपरी हिस्सा ढहा, नीचे बने मंदिर पर गिरा मलबा
प्रशासन की घोर लापरवाही: 6 महीने पहले लिखित शिकायत के बाद भी सोता रहा जलदाय विभाग; ट्रेन गुजरने पर हिलती थी जर्जर टंकी, दहशत में लोग
अलवर (राजस्थान) अलवर शहर के दाऊदपुर फाटक के पास सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ पिछले कई सालों से जर्जर हो चुकी करीब 45 साल पुरानी और 2 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी का ऊपरी हिस्सा (टॉप) शाम करीब 4 बजे अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया। टंकी का भारी-भरकम मलबा ठीक नीचे बने 26 साल पुराने हनुमान मंदिर की छत पर जा गिरा, जिससे मंदिर की छत क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत यह रही कि हादसा दोपहर के वक्त हुआ, जिससे उस समय मंदिर में भक्तों की भीड़ नहीं थी, वरना एक बड़ी जनहानि हो सकती थी।
इस गंभीर घटना के एक घंटे बाद तक भी जलदाय विभाग (PHED) या स्थानीय प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा। अधिकारियों की इस बेरुखी और लापरवाही को लेकर स्थानीय निवासियों और मंदिर कमेटी में भारी आक्रोश व्याप्त है।
- तेज धमाके के साथ गिरा मलबा, हवा में लटका है खतरा
मंदिर के पुजारी गगन शर्मा ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 11 बजे भी टंकी से प्लास्टर और मलबे के कुछ टुकड़े गिरे थे। इसके बाद शाम करीब 4 बजे अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई और टंकी का ऊपरी व अगल-बगल का पूरा हिस्सा नीचे आ गिरा।
वर्तमान में स्थिति और भी डरावनी बनी हुई है। मलबे का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी केवल लोहे के पतले सरियों के सहारे हवा में झूल रहा है, जो कभी भी नीचे गिर सकता है। टंकी के ठीक चारों तरफ घनी आबादी, रिहायशी मकान और बाजार की दुकानें हैं, जिसके कारण पूरे इलाके के लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
- रेलवे ट्रैक के कंपन से हिलती थी टंकी, 6 महीने पहले दी थी चेतावनी
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह टंकी पूरी तरह अपनी मियाद पूरी कर चुकी थी। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष राधारमण विजय और पुजारी ने बताया, "जब भी पास के रेलवे ट्रैक से कोई ट्रेन गुजरती थी, तो इस टंकी में तेज कंपन होता था और यह हिलने लगती थी। हमने खतरे की गंभीरता को भांपते हुए 6 महीने पहले ही जलदाय विभाग के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन अधिकारियों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।"
- अगर बाहर की तरफ गिरती टंकी, तो बिछ जातीं लाशें
मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि आज टंकी का टॉप हिस्सा अंदर की तरफ और अगल-बगल का हिस्सा नीचे गिरा। अगर यह जर्जर ढांचा रिहायशी मकानों या बाजार की दुकानों की तरफ गिरता, तो कई मासूमों की जान जा सकती थी। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि हवा में लटके मलबे को तुरंत हटाया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


