AI की मदद से RPSC के रिक्रूटमेंट पोर्टल में लगाई सेंध, खुद के चयन के लिए विड्रॉ किए 3 अभ्यर्थियों के आवेदन; आरोपी इंजीनियर गिरफ्तार
जयपुर/दौसा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के रिक्रूटमेंट पोर्टल से छेड़छाड़ और सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाने का एक बेहद सनसनीखेज और हाई-टेक मामला सामने आया है। साइबर थाना पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और कोडिंग की मदद से पोर्टल हैक करने वाले आरोपी माइनिंग इंजीनियर राहुल कुमार मीणा को गिरफ्तार किया है। आरोपी वर्तमान में झारखंड में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में कार्यरत है और 25 तारीख तक पुलिस रिमांड पर है।
ChatGPT और DeepSeek से तैयार किए थे 'हैकिंग प्रॉम्प्ट'
पुलिस पूछताछ में आरोपी राहुल मीणा ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वह शुरू से ही आईटी और कोडिंग में गहरी रुचि रखता था। दिसंबर 2025 से ही उसने आरपीएससी पोर्टल में सेंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी थी।
वह ChatGPT और DeepSeek जैसे एआई प्लेटफॉर्म्स पर लगातार ऐसे प्रॉम्प्ट कमांड तैयार कर रहा था, जिससे पोर्टल में किसी अभ्यर्थी का आवेदन विड्रॉ (वापस) किया जा सके। इसके बाद उसने एआई-जनरेटेड प्रॉम्प्ट के जरिए आरपीएससी के वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) सिस्टम को बायपास कर पहली ही कोशिश में साइट को हैक कर लिया।
खुद की सीट पक्की करने के लिए चली शातिर चाल
सहायक खनिज अभियंता (Assistant Mining Engineer) भर्ती-2024 की प्रोविजनल लिस्ट में कुल 78 अभ्यर्थी शामिल थे, जबकि पद सिर्फ 24 ही थे। इसमें एसटी (ST) वर्ग के लिए केवल 1 पद आरक्षित था, जिसके लिए 6 दावेदार थे। झारखंड से वापस राजस्थान आने की चाहत में राहुल ने इस वर्ग के नंबर-1 उम्मीदवार का फॉर्म विड्रॉ कर दिया। बाद में खुद पर शक न हो, इसलिए उसने चालाकी दिखाते हुए इसी श्रेणी के चौथे और छठे नंबर के अभ्यर्थियों के आवेदन भी विड्रॉ कर दिए।
एक ही नेटवर्क पर दो SSO ID चलने से खुला राज
आरपीएससी की शिकायत पर जब साइबर टीम ने जांच शुरू की, तो पता चला कि फॉर्म विड्रॉ करने के लिए 'रवि सिन्हा' के नाम से झारखंड के आईपी एड्रेस पर एक फर्जी एसएसओ आईडी बनाई गई थी। जब पुलिस ने गहराई से पड़ताल की, तो सामने आया कि परीक्षा देने वाले राहुल मीणा की ओरिजिनल एसएसओ आईडी भी उसी नेटवर्क और आईपी एड्रेस से संचालित हो रही थी। यहीं से जांच की सुई राहुल पर टिक गई।
कॉन्स्टेबल बना 'डिलीवरी बॉय', भागते हुए दबोचा
सीओ शमशेर खां ने बताया कि जब पता चला कि राहुल छुट्टी लेकर अपने गांव दौसा आ चुका है, तो एक विशेष टीम भेजी गई। टीम के कॉन्स्टेबल सोनू चौधरी ने शातिर दिमाग लगाते हुए एक निजी कंपनी के डिलीवरी बॉय का रूप धारण किया। उसने राहुल के छोटे भाई लोकेश को फोन कर कहा कि उसका एक जरूरी कोरियर आया है, पता नहीं बताने पर वापस चला जाएगा। भाई झांसे में आ गया और उसने घर का पता दे दिया। जैसे ही पुलिस पहुंची, राहुल ने भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने उसे दबोच लिया।
शिक्षित परिवार, FSL जांच के लिए भेजे उपकरण
पकड़े जाने के डर से राहुल ने अपने मोबाइल और लैपटॉप का पूरा डेटा डिलीट कर दिया था। पुलिस ने दोनों डिवाइस जब्त कर एफएसएल (FSL) जांच के लिए भेज दिए हैं, जिससे डेटा रिकवरी के बाद और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि राहुल एक बेहद शिक्षित परिवार से है। उसके पिता सरकारी बैंक में मैनेजर हैं, बहन सरकारी कर्मचारी है और छोटा भाई भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या राहुल ने एआई के जरिए पहले भी किन्हीं अन्य परीक्षाओं या निजी वेबसाइटों में इस तरह की सेंधमारी की है।


