नंदराय में 2 महीने से जारी बंदर का आतंक खत्म, 3 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों ने ली चैन की सांस
गुरला (बद्री लाल माली) नंदराय गांव में पिछले एक-दो महीनों से आतंक का पर्याय बने एक बंदर को आखिरकार वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित पकड़ लिया है। बंदर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और पूरा गांव अब भयमुक्त हो गया है।
- मकानों को पहुंचा रहा था नुकसान, बना था जान का खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, यह बंदर पिछले दो महीनों से गांव के कई मकानों में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचा रहा था। इसके आक्रामक व्यवहार के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल था और लोगों को अपनी जान का खतरा सता रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामवासी दीपक बाबेल ने तुरंत वन विभाग को इसकी लिखित व मौखिक सूचना दी और गांव को इस संकट से उबारने की मांग की।
- 3 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू सोसायटी के नारायण लाल बेरवा हरकत में आए। उन्होंने तुरंत अपनी टीम तैयार की और नंदराय गांव पहुंचे। टीम ने पूरे तालमेल और सूझबूझ के साथ करीब 3 घंटे तक सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। बंदर काफी चालाक था, लेकिन टीम की रणनीति के आगे वह टिक नहीं सका और उसे पूरी तरह सुरक्षित तरीके से काबू कर लिया गया।
- जंगल में किया गया मुक्त, टीम की हुई तारीफ
रेस्क्यू टीम ने बंदर को आबादी क्षेत्र से काफी दूर, उसके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण (जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में नारायण लाल बेरवा के साथ धर्मराज और कैलाश बेरवा मुख्य रूप से शामिल थे। बंदर के पकड़े जाने पर पूरे गांव ने रेस्क्यू टीम की कार्यशैली की जमकर सराहना की और उनका आभार जताया।
रेस्क्यू टीम के प्रभारी नारायण लाल बेरवा ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया कि इन बंदरों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वर्गीकृत और संरक्षित किया गया है। भारत में इन्हें पकड़कर रखना, प्रताड़ित करना या पालतू जानवर के रूप में घर में रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। ऐसा करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।


