गायत्री नगर में श्रुत पंचमी महोत्सव पर श्रुत स्कन्ध विधान भक्ति के साथ सम्पन्न
जयपुर (कमलेश जैन)
श्री दिगंबर जैन मंदिर महारानी फार्म, गायत्री नगर जयपुर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में परम पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज एवं चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुध्द सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती विदुषी शिष्या परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री विभा माताजी के ससंघ सानिध्य में गायत्री नगर जैन मन्दिर जी में श्रुत पंचमी महोत्सव 19 जून शुक्रवार को प्रातः 6 बजे से विभिन्न धार्मिक,सामाजिक, व सांस्कृतिक आयोजनों के साथ बडे ही उत्साह व भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।
युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने अवगत कराया कि आर्यिका श्री विभा माताजी ससंघ कै मंगल सानिध्य में प्रातः 6बजे से नित्य अभिषेक की क्रियायें विधानाचार्य पं. अजीत जैन शास्त्री के निर्देशन में प्रारम्भ हुईं, तत्पश्चात प्रथम अभिषेक कर्ता अनिल जैन श्रीमहावीर जी वाले, द्वितीय सारसमल पदम झांझरी परिवार द्वारा अभिषेक व शान्ति धारा की, इस अवसर पर पूज्य माताजी द्वारा सहस्त्रनाम के1008 मंत्रों से श्री जी के मस्तक पर जल धारा उपस्थित समस्त इन्द्रों द्वारा की गयी ।
कार्यक्रम संयोजक पदम झांझरी के अनुसार उपरोक्त कार्यक्रम के सोधर्म इन्द्र बनने का सोभाग्य कमला देवी काला कन्नोज, आलोक, अरूण- ज्योति शाह को प्राप्त हुआ, साथ में ईसान शानत आदि इन्द्र अशोक -अन्जू जैन विधान सभा वाले, कमल-पुष्पा मालपुरा वाले,राकेश संगीता छबडा, बिमल अर्चना लुहाडिया, आशीष- मनीषा टोंग्या, आलोक बीना चोकडायत परिवार के साथ, कैलाश छाबडा, रिखब पाण्डया, उदयभान जैन, सुबोध जैन आदि सैंकडो महिला पुरूषों ने भक्ति के साथ श्रुत स्कन्थ विधान पूजायें की गयीं।
विधान सामग्री पुण्यार्जक सुनील लता सोगानी परिवार थे।
पूज्य गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी का पाद् प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, दीप प्रज्वलन सोधर्म इन्द्र अरूण ज्योति शाह परिवार द्वारा किया किया गया।
इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में श्रुत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डाला, उन्होने कहा कि तीर्थंकरों की वाणी भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण के 683 वर्ष पश्चात श्रुत के रूप में थी, आचार्यों के चिन्तन में आया की अब सुनने की क्षमता कम होने लगी तब उस समय पंचमी के दिन तीर्थकरों की वाणी लिपिबध्द होकर जिनवाणी के रूप में विराजमान हुई,जिनवाणी का रथ उत्सव मनाया , जैन संस्कृति में जिस प्रकार देव व गुरूओं को पूजा जाता है। उसी प्रकार जिनवाणी की पूजा होती है। पूज्य माता जी ने कहा कि प्रत्येक श्रावक व श्राविकाओं, बच्चों को अपनी जीवन शैली में स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए, चाहे 1घन्टे करो या 1 मिनिट का करो ।
इस अवसर पर सांय 7 बजे से परम पूज्य श्रमणी आर्यिका विनय श्री माताजी ने प्रशनोत्तरी करवायी, तत्पश्चात बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम व सामाजिक संस्कारों पर आधारित लघु नाटिका संयोजिका संगीता छाबडा, मनीषा टोंग्या, बीना टोंग्या, नेहा कटारिया के निर्देशन में सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर सभी लघु नाटिका में भाग लेने वाले बच्चों को व 17 जून को आयोजित धार्मिक पाठ प्रस्तुति करने वाले सभी महिला पुरूष व बच्चों को सम्मानित किया गया।
मन्दिर प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष व उनकी टीम ने उपस्थित अतिथियों, विधानाचार्य जी का माला, तिलक, दुपट्टा, साफा पहनाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्व योग दिवस 21जून के पोस्टर का विमोचन भाजपा आई टी सैल की जिला सह संयोजिका जयपुर शहर अंशु गर्ग, रघु विहार विकास समिति के अध्यक्ष सुरेश जैन, गायत्री नगर के पारस जैन, आर एस एस के जीतेन्द्र बाकलीवाल, व मन्दिर प्रबन्ध समिति के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। अन्त में सभी का आभार कार्यक्रम संयोजक पदम झांझरी द्वारा किया गया।


