965 दिनों में 17.65 लाख दण्डवत कर खाटूधाम पहुंचे केदार कटारा, हाईवे पर हुआ भव्य स्वागत; समाज सेवा का लिया संकल्प
हलैना (विष्णु मित्तल)। श्रद्धा और अटूट विश्वास हो तो कोई भी राह नामुमकिन नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है रूपवास निवासी श्याम प्रेमी केदार कटारा ने। उन्होंने एक साथ 11 नारियल हाथ में लेकर 11 दण्डवत लगाने की बेहद कठिन साधना करते हुए सीकर के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी तक की यात्रा पूरी की। इस अद्भुत दण्डवत यात्रा को पूर्ण कर जब वे वापस लौटे, तो जयपुर नेशनल हाईवे-21 पर स्थित गांव हन्तरा और डहरा में श्री श्याम बाबा भक्त मण्डल एवं स्थानीय निवासियों ने उनका पलक-पावड़े बिछाकर भव्य अभिनंदन किया। इस दौरान भक्तों ने श्याम रथ में विराजमान बाबा श्याम के विग्रह और निशान की विशेष पूजा-अर्चना की।
- 24 अक्टूबर 2023 को शुरू हुई थी यात्रा
श्याम भक्त केदार कटारा ने बताया कि उन्होंने यह कठिन यात्रा 24 अक्टूम्बर 2023 को भरतपुर जिले के कस्बा रूपवास स्थित भैरवगढ़ के श्री हनुमान मंदिर से प्रारम्भ की थी। उन्होंने 965 दिवस की कठिन अवधि में लगभग 335 किलोमीटर की दूरी तय की। इस पूरी यात्रा के दौरान उन्होंने कुल 17 लाख 65 हजार 786 दण्डवत लगाईं। यात्रा के दौरान भरतपुर, दौसा, जयपुर और सीकर जिलों के 50 से अधिक कस्बों व गांवों में 'एक रात श्याम बाबा के नाम' भजन संध्या, धार्मिक गोष्ठियां और प्रवचन के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
"इंसान जीवन में तभी सफलता हासिल कर सकता है, जब उसका लक्ष्य निर्धारित हो और ईश्वर पर अटूट विश्वास कायम हो।" — केदार कटारा, श्याम प्रेमी व दण्डवत यात्री
हाईवे पर यात्रा के पहुंचने पर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। गांव हन्तरा में विजयपाल सिंह, चेतराम सिंह, छत्तर सिंह, गुड्डू चौधरी, हरीराम मास्टर, सन्तोष चौधरी, मूलचन्द बाबूजी, मास्टर धनवीर डागुर और हरभान सिंह ने कटारा का स्वागत किया। वहीं, गांव डहरा की पुरानी पुलिस चौकी वाले हनुमान मन्दिर पर सन्त ललित मोहन शरण महाराज ने उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके अलावा यादव पम्प पर राजवीर यादव, सुशीला यादव, राजू यादव, सुशीला देवी, नन्दराम सरसैना और पवन सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर उनका अभिनंदन किया।
- धार्मिक और सामाजिक संदेश है यात्रा का उद्देश्य
केदार कटारा ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ समाज को जागरूक करना है। उन्होंने अपना जीवन देश, समाज, गौवंश व मानव सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया है। यात्रा के माध्यम से वे वन संपदा की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, विश्व शांति, राष्ट्र उत्थान, स्वास्थ्य व स्वच्छता और सरकारी योजनाओं के प्रति आमजन को जागरूक कर रहे हैं। उनका लक्ष्य समाज में भाईचारा कायम करना और हर गांव में कम से कम 11 परिवारों को श्याम भक्ति से जोड़ना है।
- धार्मिक यात्राओं का रहा है लंबा इतिहास
कटारा इससे पहले भी कई कठिन धार्मिक यात्राएं कर चुके हैं। इनमें ब्रज की 11 बार 84 कोसी परिक्रमा, वृन्दावन की 51 बार पांच कोसी परिक्रमा, गोवर्धन की 101 परिक्रमा सहित भैरवगढ़ से केदारनाथ, बद्रीनाथ, हरिद्वार, नीलकंठ, रामेश्वरम, जगन्नाथपुरी और वैष्णोदेवी आदि धामों की एक-एक पदयात्रा शामिल है।


