लक्ष्मणगढ़ में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू: विशाल घटयात्रा के साथ मनाया गया भगवान आदिनाथ का गर्भकल्याणक

Jun 22, 2026 - 19:16
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लक्ष्मणगढ़ में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू: विशाल घटयात्रा के साथ मनाया गया भगवान आदिनाथ का गर्भकल्याणक

लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) कस्बे में सोमवार से जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के पावन पंचकल्याणक महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन आचार्य मुनि श्री ज्ञान भूषण जी महाराज (रत्नाकर) ससंघ के पावन सानिध्य में भगवान का गर्भकल्याणक महोत्सव बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

  • भव्य घटयात्रा का जगह-जगह स्वागत

महोत्सव की शुरुआत प्रातः काल दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक, नित्यमह पूजन, गर्भकल्याणक पूजन और गुरु आमंत्रण के साथ हुई। इसके पश्चात मंदिर जी से एक विशाल घटयात्रा व रथयात्रा रवाना हुई। बैंड-बाजों और भजनों की मधुर धुनों के साथ यह यात्रा कस्बे के प्रमुख मार्गों से गुजरी। घटयात्रा के दौरान खंडेलवाल समाज, स्थानीय व्यापारियों और विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने जगह-जगह यात्रियों और समाज के लोगों का पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। यह यात्रा जालूकी रोड स्थित खंडेलवाल शिक्षण संस्थान परिसर में बने विशाल पंडाल (धर्मनगरी अयोध्या) पहुंची।

  • मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुईं धार्मिक क्रियाएं

पंडाल में घटयात्रा के पहुंचने पर शास्त्रीय पंडित अरविंद जैन के निर्देशन में ध्वजारोहण, मंडप शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा, मंगल कलश स्थापना, जप स्थापना और वेदी शुद्धि जैसी महत्वपूर्ण शास्त्रीय धार्मिक क्रियाएं विधि-विधान से संपन्न की गईं। दोपहर के सत्र में माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म अदा की गई, जिसमें महिलाओं ने मंगल गीत गाए।

सही साधना से मनुष्य बन सकता है परमात्मा: आचार्य ज्ञान भूषण

विशाल पंडाल में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञान भूषण जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि भारतीय दर्शन में पाषाण (पत्थर) और मनुष्य की स्थिति भले ही अलग हो, लेकिन दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही है। उन्होंने कहा: "मंत्रों और शुद्ध संकल्प के माध्यम से जब पत्थर की मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है, तो उसमें दिव्य ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों की श्रद्धा उसे पूजनीय बना देती है। वहीं, मनुष्य में स्वयं परमात्मा (आत्मा) का अंश मौजूद है। जैन दर्शन के अनुसार, सही साधना और उत्तम कर्मों के बल पर हर सामान्य मनुष्य स्वयं परमात्मा (सिद्ध) बन सकता है।"

शाम को महाआरती और शास्त्र प्रवचन हुए, जबकि रात्रि में समाज के बच्चों और युवाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं। महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मंगलवार (23 जून) को प्रातः काल धर्मनगरी अयोध्या से भगवान के जन्म कल्याणक की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें इंद्र देव ऐरावत हाथी पर सवार होकर चलेंगे। इसके बाद पांडुकशिला पर पहुंचकर पवित्र कलशों से मंत्रोच्चार के साथ श्रीजी का जन्माभिषेक (जन्मोत्सव) धूमधाम से मनाया जाएगा।

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