धरने के 64 वे दिन आंदोलनकारियों ने खानों पर ही पड़ाव लगाने की दी चेतावनी

Mar 20, 2021 - 23:39
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धरने के 64 वे दिन आंदोलनकारियों ने खानों पर ही पड़ाव लगाने की दी चेतावनी

ड़ीग (भरतपुर,राजस्थान/ पदम जैन) ब्रज के पर्वतों पर हो रहे खनन के विरोध में गांव पसोपा में जारी धरने के  64 वे दिन शनिवार को धरना स्थल पर धरनार्थियों ने पुलिस प्रशासन, खनन विभाग व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया एवं चेतावनी दी कि अगर 23 मार्च को खनन विभाग द्वारा आदिबद्री पर्वत पर नए खनन पट्टों की नीलामी की गई तो वह खनन क्षेत्र पर  जाकर अनिश्चितकालीन पड़ाव डालेंगे। महंत शिवराम दास ने कहा कि प्रशासन मानवीय भावनाओं की अनदेखी कर आदिबद्री पर्वत को नष्ट करने पर तुला हुआ है इसीलिए इतने भारी जन विरोध के बाद भी भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली रहे व कई तीर्थों को अपने अंदर समाहित किए हुए परम परम पवित्र पर्वत आदिबद्री पर नए खनन पट्टे देकर उसको नष्ट करके सनातन धर्म को अपूर्णीय क्षति पहुंचाने में लगा हुआ है ।
आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल मिला राजस्थान के मुख्य सचिव से अविलंब खनन को बंद करने की कि अपील
शुक्रवार की  देर रात जयपुर में आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के मुख्य सचिव  निरंजन आर्य से भेंट  कर उनको आदिबद्री व कनकाचल पर्वत पर हो रहे विनाशकारी खनन के बारे में अवगत कराया साथ ही 10 अप्रैल के बाद तय किए गए महापड़ाव के बारे में जानकारी दी ।  वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संगीता गर्ग ने इस मौके पर मुख्य सचिव को कहा कि हमारी सरकार को अविलंब इन साधु-संतों व  ग्रामवासियों की पूर्ण संवैधानिक मांग को स्वीकार कर ब्रज के पर्यावरण, पौराणिक संपदा व प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव से  कहा कि बहुत अच्छा तो यह होगा कि 25 मार्च से पूर्व ही आदिबद्री व कनकाचल पर्वत को खनन मुक्त कर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाए। ताकि जयपुर में संपन्न होने वाली जनचेतना रैली को अभिवादन रैली में परिवर्तित कर सरकार के पक्ष में  धन्यवाद ज्ञापित किया जा सके ।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य  संरक्षण समिति के संरक्षक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि सरकार की छवि के लिए यह बहुत अशोभनीय है कि पिछले 63 दिनों से क्षेत्र की गरीब जनता व साधु-संत ब्रज के पर्यावरण, जनजीवन, पर्वतों व अपनी पौराणिक मान्यताओं की रक्षा के लिए आन्दोलनरत्त हैं और फिर भी सरकार द्वारा सब कुछ जानने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वे अभी भी गहलोत सरकार पर भरोसा करते हैं कि उनके द्वारा उक्त पर्वतों की अविलंब रक्षा की जाएगी क्योंकि 2009 में भी उन्हीं ही ने ब्रज के पर्वतों के एक बड़े हिस्से को संरक्षित किया था । वही पूर्व विधायक गोपी गुर्जर ने कहा की अगर 10 अप्रैल तक सरकार गरीब जनता व साधु-संतों की बात मान कर ब्रज के पर्यावरण एवं पर्वतों का रक्षण नहीं करती है तो विवश होकर सारे समाज को सरकार की उदासीनता के खिलाफ बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा । मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को  शीघ्र कार्यवाही का  विश्वास दिलाया व साथ ही उन्होंने आगामी 25 मार्च को  जयपुर में संपन्न होने वाली जनचेतना रैली को स्थगित करने की अपील की । इस पर प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि सरकार अगर 25 मॉर्च से पूर्व इस विषय में कोई सकारात्मक कार्यवाही करती है तो वे इस बारे में धरनार्थियों के साथ बैठ कर चर्चा कर सकते हैं । इस अवसर पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री बच्चू सिंह बैंसला, समाजसेवी चंद्रशेखर खूटेंटा, महेश्वरी समाज के संयोजक लक्ष्मीनारायण मुछाल, शराबबंदी आंदोलन के संयोजक अंकुर छाबड़ा व कई समाज के गणमान्य प्रतिनिधि मोजूद थे।
 

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