कचरे में सिमटती नौनिहालों की जिंदगी, जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए वो आज ढो रहे बोझा

आखिर कैसे आगे बढ़ेंगे कचरा ढोने वाले ये बच्चे

Jul 10, 2021 - 02:10
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कचरे में सिमटती नौनिहालों की जिंदगी, जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए वो आज ढो रहे बोझा

उदयपुरवाटी  (झुंझनु, राजस्थान/सुमेरसिंह राव)  कोरोना वैश्विक महामारी के चलते जहा सरकारी व निजी शिक्षण संस्थाएं संचालित नहीं हो रही है वहीं उन विद्यालयों में पढ़ने वाले  गरीब तबके के बच्चे दिनभर बाजारों में भारी भरकम बुझा ढोते आ रही हैं l स्कूली नहीं खुलने के कारण बच्चे दिन भर घरों में बोर हो जाते हैं l जो गरीब तबके के नौनिहाल हैं उनकी जिंदगी तो बस कचरे में ही सिमटती ही नजर आ रही है l दिन में चिलचिलाती धूप में यह नौनिहाल नंगे पांव कस्बे की गलियों में कचरा बीनते नजर आ ही जाते हैं l वाह रे केंद्र व राज्य की सरकारों क्या नौनिहालों का यही हाल होता रहेगा या फिर इनके हाथों में पार्टी पोथी देकर इनको देश का एक शिक्षित नागरिक भी बनाया जा सकेगा l अगर यह नौनिहाल ऐसे ही कचरे में नंगे पांव बोझा ढोते रहेंगे तो आखिर कैसे हमारा देश आगे बढ़ेगा यह केंद्र व राज्य सरकार को सोचना चाहिए कचरा बीनने वाले नौनिहालों को उनके घर वाले  नंगे  पांव भेज देते हैं दिनभर यह बच्चे गलियों में घूम घूम कर कचरा बीनते रहते हैं l कचरा बीनने वाले नौनिहालों पर न तो इनके घर वालों का ध्यान रहता है न ही सरकारों का  l

 

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