स्थानीय लोग उम्मीदों से निराश, संसाधनों और सुविधाओं का अभाव

Jun 23, 2025 - 11:57
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स्थानीय लोग उम्मीदों से निराश, संसाधनों और सुविधाओं का अभाव

खैरथल (हीरालाल भूरानी) 
        खैरथल-तिजारा जिले को बने दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जिस रफ्तार से विकास की उम्मीदें थीं, वह अभी हकीकत से कोसों दूर हैं। जिला मुख्यालय पर न तो स्थायी सचिवालय है और न ही सभी ज़रूरी विभाग पूरी तरह से कार्यरत हैं। जिला मुख्यालय पर अनेक विभाग कार्यालय आज भी  किराये के भवनों, धर्मशालाओं और निजी जगहों पर संचालित हो रहे हैं।  कृषि उपज मंडी के एग्रो टावर को अस्थायी सचिवालय कार्यालय  बनाकर काम चलाया जा रहा है। कई  विभाग जैसे शिक्षा, जलदाय, समाज  कल्याण, कृषि, सूचना एवं जनसंपर्क, कोष कार्यालय आदि किसी तरह से कार्यरत हैं, लेकिन अधिकांश के पास पर्याप्त स्टाफ, वाहन और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है।
    पुराने जिलों से ही चल रही व्यवस्थाः
      अब भी खैरथल-तिजारा क्षेत्र के नागरिकों को परिवहन, जलदाय, वनए विद्युत जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए अलवर या भिवाड़ी का रुख करना पड़ता है। वाहन पंजीकरण अब भी अलवर से हो रहा है, जबकि भिवाड़ी में नई सीरीज शुरू होने के बावजूद भी पंजीकरण लंबित हैं। शिक्षा विभाग में शाला दर्पण पर अभी तक नए जिले के अनुसार रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ, जिससे ब्लॉक और विद्यालयों का प्रशासनिक संचालन अस्त-व्यस्त है।

जिला न्यायालय की भी टली शुरुआत, वकीलों ने जताया विरोध : 
       सरकार ने हाल ही में जिला मुख्यालयों पर कोर्ट स्वीकृत किए हैं किशनगढ़बास के एडीजे को डीजे पद का दायित्व सौंपा गया, उनके खैरथल पहुंचने पर जिला कलक्टर ने भवनों का निरीक्षण कराया लेकिन बाद में भवन और जमीन की अनुपलब्धता का पत्र जारी कर दिया गया। अभिभाषक संघ ने इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताया है और विरोध दर्ज कराया।

प्रशासनिक लापरवाही या बजट का बहाना :        
      सरकार ने नए जिलों के लिए 1000 करोड़ रुपए प्रति जिला बजट में घोषित किए थे, लेकिन आज तक खैरथल में उस बजट का कोई ठोस उपयोग नहीं दिखता। जिला कलक्टरों के लगातार तबादलों के बाद वर्तमान कलक्टर किशोर कुमार कार्यरत हैं, पर अब तक न तो सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाया गया और न ही भवन निर्माण का कोई प्रयास हुआ है।

सिर्फ जिले का नाम बड़ा :
     शहर में आज भी पेयजल संकट, थोड़ी बारिश में बिजली गुल होना, गंदगी, टूटी सडकें और अतिक्रमण से सिकुड़ती सडकें, शहर में जाम की नागरिकों के लिए रोज़मर्रा की समस्या हैं। दो साल बाद भी खैरथल. तिजारा में बदलाव का अनुभव नहीं हो रहा है।

रियल एस्टेट में उछाल, आमजन से दूर हुई ज़मीन : 
     जिले की घोषणा के बाद जैसे ही प्रशासनिक गतिविधियां शुरू हुई, बड़े प्रॉपर्टी डीलर, राजनेता और अधिकारियों ने जमीनों में निवेश कर भावों को कई गुना बढ़ा दिया। आज मध्यमवर्ग और गरीब तबका खैरथल में ज़मीन खरीदने का सपना तक नहीं देख सकता।

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