श्रद्धा एवं गुरु भक्ति का प्रतीक गुरु पूर्णिमा पर्व 10 जुलाई को
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन )जुलाई का महीना आरंभ होते ही हिंदू पंचांग के महत्वपूर्ण पर्वों का सिलसिला शुरू हो जाता है। जुलाई में पड़ने वाली पूर्णिमा इसलिए खास है क्योंकि इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा का पर्व सनातन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी माना गया है। इस दिन गुरु के प्रति आस्था, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि पंचांग के अनुसार जुलाई महीने की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जुलाई की रात 1 बजकर 36 मिनट से हो रही है और इसका समापन 11 जुलाई की रात 2 बजकर 6 मिनट पर होगा। इसलिए इस बार 10 जुलाई 2025 को पूर्णिमा पड़ रही है और इसी दिन का गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखने और गुरु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में ज्ञान, शांति और प्रगति भी प्राप्त होती है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक भाव भी है। यह दिन हमें हमारे जीवन में गुरु के मार्गदर्शन और योगदान को स्मरण करने का अवसर देता है। यह वही दिन है जब आदियोगी भगवान शिव ने सप्तऋषियों को प्रथम बार ज्ञान प्रदान किया था और स्वयं वे प्रथम गुरु कहलाए।
महर्षि वेदव्यास का जन्म भी इसी दिन हुआ था, जिनके सम्मान में इस तिथि को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पर्व अध्यात्म, श्रद्धा और गुरु भक्ति का प्रतीक है।गुरु पूर्णिमा गुरु और शिष्य के पवित्र बंधन का उत्सव है।
गुरु अपने शिष्यों को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं, इसलिए इस दिन गुरुओं का सम्मान किया जाता है।
गुरु पूर्णिमा 2025 के शुभ मुहूर्त
इस पावन दिन पर पूजा-पाठ और व्रत का विशेष महत्व है। यदि आप शुभ समय में पूजन करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्तों का पालन कर सकते हैं।
- अभिजित मुहूर्त- दोपहर 11:59 बजे से 12:54 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07:21 बजे से 07:41 बजे तक
- अमृत काल- राज 12:55 बजे से, जुलाई 11 रात 02:35 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दिन में 02:45 बजे से 03:40

