वीरांगना रूप कुवर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन
मैंने नित नूतन गीतों में कई नए इतिहास लिखे हैं-प्रणय शर्मा यश.
रूपबास, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) शहर के सिरसौदा रोड स्थित परमार सदन के सभागार में वीरांगना रूप कुवर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा रविंद्र सिंह परमार पूर्व प्रधान के मुख्य आतिथ्य में एवं शिक्षक नेता व संरक्षक हरिशंकर शर्मा की अध्यक्षता तथा विशिष्ट अतिथि अजय कुमार सहायक लोक अभियोजक ,गोविंद सिंह
परमार साहित्यकार व ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र गौड के सानिध्य में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
अतिथियों द्वारा मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रजलन कर माल्यार्पण किया गया। गीतम सिंह परमार वरिष्ठ कवि द्वारा मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की वंदना के शब्द सुनो मां शारदे।
कवि सम्मेलन के आयोजक शैलेंद्र सिंह परमार बैंक प्रबंधक व अजय सिंह परमार ने अतिथियों एवं कवियों को साफा बांधकर एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। कवि सम्मेलन में ओज,वीर,शृंगार व हास्य की रचनाएं कवियों द्वारा सुनाई गई।
कवि सम्मेलन की यात्रा का शुभारंभ बाल कवि प्रणय शर्मा यश ने गीत के माध्यम से कहा मैंने नित नूतन गीतों में कई नए इतिहास लिखे हैं। लिखी गरीबों की मजबूरी धनवानो के अहम लिखे हैं। श्रोताओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया। कवि विकास सिकरवार ने धधक रहे शब्दों की ज्वाला से उगते दिनकर का श्रृंगार लिखो। वरिष्ठ कवि मनोज खंडूजा
ने कहा जिंदगी कभी तो हिसाब लेगी,खोलेगी खाते मय ब्याज देगी। कवि संजय हिंदुस्तानी ने कहा कि सादा जीवन उच्च विचार यही हमको मार रहे कविता सुनाई। श्रृंगार के कवि दिनेश अनुभवी ने कहा कि साधना छोड़कर व्यंजनों की तुम, वेदनाओं की ही अर्चना सीख लो। बालकवी कौशल गौड ने कहा कि मेरे देश की बेटी बेटों से महान है। वरिष्ठ कवि गोविंद सिंह परमार ने वीर रस की कविता के माध्यम से कहा कि घर में घुसकर ढोका हमने और ऑपरेशन सिंदूर हो गया। वरिष्ठ कवि आनंद प्रकाश आनंद ने कविता के माध्यम से पाकिस्तान को ललकारते हुए कहा कि पाकिस्तानी झंडे से ऊपर हिंदुस्तानी झंडा की कहानी जिंदा है। कवि हेमेंद्र परमार मनु ने कहा कि वाणी जब हो जाएगी मोन कविता सुनाई।
अंकित गोला ने सूर्य भी उदित हो शाम को ढल जाता है हर उत्थान का अवसान आवश्यक तयआता है। वरिष्ठ कवि एवं गीतकार गीतम सिंह परमार ने गीत के माध्यम से असुअनि भरे हैं ये बिटिया के नैन, लाडली के नैन , लली ससुरारि चली। युवा कवि एवं गीतकार योगेश कौशिक ने कहा आजाद हिंद का लिखूं पराक्रम या नेता जी का बलिदान लिखें कविता सुनाई तथा श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। कवि मनोज मधुर ने भी कविता सुनाई। मंच के संयोजक ज्ञानी राम अज्ञानी ने सांसदों की कार्यशैली पर हमला करते हुए कहा संसद में खोटे सिक्कों को हमने आज उछलते देखा। मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान रविंद्र सिंह परमार ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि लोकतंत्र में कलाम की ताकत के आगे सभी बल बेकार हैं अतः कवि एवं साहित्यकारों को समाज एवं देश के लिए रचनात्मक कदम उठाने के लिए कृत संकल्प हो। अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ शिक्षक नेता हरिशंकर शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राजेंद्र सिरसौदा, महेंद्र सिंह शर्मा, पंडित हरि महालपुर काछी, सुनील सिकरवार, अरुण परमार, रामकुमार, शैलेंद्र सिंह परमार, अजय सिंह परमार, ओमकार शुक्ला , लक्ष्मण सिंह भाटी, उमेद सिंह, डूंगर सहाय दत्तात्रेय, प्रताप हवलदार आदि उपस्थित थे।
कवि सम्मेलन का संचालन युवा कवि योगेश कौशिक ने किया।

