दश लक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन
जैन धर्म में दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म का पालन किया जाता है। मुनिश्री 1008 ज्ञान भूषण जी महाराज रत्नाकर ने अपने प्रवचनों के दौरान बताया कि उत्तम शौच जिसका अर्थ है आंतरिक और बाहरी पवित्रता तथा संतोष का भाव। जैन धर्म में दशलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म का होता है। अर्थ है सर्वोच्च पवित्रता और संतोष इस दिन का मुख्य उद्देश्य मन को संतोषी बनाना और जो कुछ भी अपने पास है, उसके लिए परमात्मा का धन्यवाद करना है।
दशलक्षण पर्व के चार दिन
1. उत्तम क्षमा:
सहनशीलता रखना और क्रोध को नियंत्रित करना।
2. उत्तम मार्दव:
चित्त में मृदुता और विनम्रता होना, अहंकार का त्याग करना।
3. उत्तम आर्जव:
जीवन में सरलता और सीधापन अपनाना।
4. उत्तम शौच:
सर्वोच्च पवित्रता, मन की शुद्धता और संतोष का भाव रखना।
दशलक्षण पर्व के दौरान कस्बे के दिगंबर जैन मंदिर में धर्म प्रभावना की जा रही है। प्रतिदिन भगवान का अभिषेक शांति धारा नित्य नियम पूजा के साथ शाम महा आरती का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें श्रद्धालु बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
दिगंबर जैन समाज में पयुर्षण पर्व/ दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा, दूसरे दिन उत्तम मार्दव, तीसरे दिन उत्तम आर्जव, चौथे दिन उत्तम शौच.. का पालन किया गया।


