पूर्व विधानसभा अध्यक्ष्तिवारी पंचतत्व में विलिन :सीएम भजनलाल शर्मा ने दी श्रंद्वाजली ,सर्व दलिय नेताओं ने प्रकट किया दुःख
हलैना (विष्णु मित्तल) राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष पूर्वी राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता 105 वर्षीय गिर्राज प्रसाद तिवारी का शुक्रवार को निधन हो गया और उनका अन्तिम संस्कार पैतृत्व गांव बिडयारी में किया गया। जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा,राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डाॅ.अरूण चतुर्वेदी,भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डाॅ.सतीश पूनिया,वैर के विधायक बहादुर सिंह कोली,बयाना की विधायक ऋतृ बनावत,पूर्व सांसद रंजीता कोली,पूर्व सांसद पण्डित रामकिसन,समृद्व भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता,जिला व्यापार महासभा के जिलाध्यक्ष संजीव गुप्ता,भाजयुमोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ऋृषि बंसल,युवा अग्रवाल सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री ओमप्रकाश गुप्ता अचार वाले,भाजपा जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा,कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा,समाजसेवी विनय अग्रवाल,दाऊदयाल गुप्ता खादी वाले,,राजेन्द्र शर्मा खादी वाले,बृजमोहन गुप्ता एडवोकेट आदि सहित सर्वदलिय नेताओं ने श्रंद्वाजलि अर्पित की और पुष्पचक्र अर्पित का उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। जिनके पौत्र पंकज तिवारी ने उन्हे मुखाग्नि दी। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत,पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट,भरतपुर के पूर्व विधायक विजय बंसल,पार्षद पंकज गोयल,दौसा की पूर्व सांसद रमा पायलट,गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम,दिवंगत केन्द्रीय मंत्री राजेश पायलट के रहे निजी सचिव विजय गुप्ता,भाजपा नेता दौलत सिंह फौजदार आदि ट्वीट तथा दूरभाष पर दुःख प्रकट करते श्रंद्वाजलि दी और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। बयाना के पूर्व प्रधान एवं उनके भतिजा महेन्द्र तिवारी ने बताया कि विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गिरिराज प्रसाद तिवारी का जन्म 20 दिसम्बर 1920 को भरतपुर जिले के बयाना उपखण्ड के विडयारी गांव में हुआ। उनके पिता का नाम हंसा राम था। स्नातक ;बीण्एण्द्ध और स्नातक ;एलएलण्बीण्द्ध की शिक्षा पूरी करने के बाद वे राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। 1935 में राजनीति में कदम रखते ही उन्होंने 1939 के प्रजा मंडल आंदोलन में योगदान देकर अपने संघर्षशील व्यक्तित्व का परिचय दिया।
तिवारी का राजनीतिक सफर लम्बा और प्रभावशाली रहा। 1950 से 1953 तक वे जिला कांग्रेस कमेटीए भरतपुर के मंत्री रहे। वर्ष 1972 में वे कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बयाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और पांचवीं विधानसभा में पहुंचे। इसके बाद 1985 में उन्होंने भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की और आठवीं विधानसभा के सदस्य बने। दो बार विधायक रहने के दौरान वे विधानसभा की गृह समिति और विशेषाधिकार समिति में सदस्य रहे। 29 मार्च 1985 से 31 जनवरी 1986 तक वे राजस्थान विधानसभा के उपाध्यक्ष और उसके बाद 11 मार्च 1990 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे। इस प्रकार उन्होंने बयाना और भरतपुर दोनों क्षेत्रों का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। राजनीति के साथ.साथ उनका झुकाव सामाजिक सरोकारों की ओर भी गहरा रहा। वे भरतपुर जिला परिषद के प्रमुख एवं प्रशासक रहे। 1968 में श्री गांधी सेवा सदन बयाना के अध्यक्ष बने। इसके अतिरिक्त सनातन धर्म विद्यालयए भरतपुर की कार्यकारिणी में उनकी अहम भूमिका रही और वे जिला पत्रकार संघए भरतपुर के संयोजक भी रहे।


