भर्तृहरि गुरु गोरखनाथ से दीक्षा लेने पहुंचे राजपाठ सब त्यागा
खैरथल (हीरालाल भूरानी) राज ऋषि अभय समाज के रंग मंच पर निरंतर अपार दर्शकों के बीच में प्रदर्शित हो रहा है नाटक महाराज भरतरी हरी ।
इस नाटक में राजा भरतरी हरी को जब महारानी पिंगला के त्रिया चरित्र से हृदय को ठेस लगती है तो वह सारा राज पाठ त्याग कर वैराग्य की दीक्षा लेने के लिए गुरु गोरखनाथ के पास जाते हैं वहां गुरु गोरखनाथ कहते हैं कि राजन अभी बहुत कमी है पहले तुम उज्जैन में जाओ और अपनी महारानी पिंगला से माता कहकर भिक्षा मांग कर लाओ तुम्हें दीक्षा इस परीक्षा के बाद ही दी जाएगी ।
इसके बाद गुरु के आदेश की पालना करते हुए भरतरी हरी अपनी पत्नी महारानी पिंगला के पास साधु वेश में भिक्षा मांगने के लिए जाते हैं । जब भरतरी अपनी पत्नी को माता कहकर भिक्षा मांगते हैं और कहते हैं की भिक्षा दे दे मैया पिंगला तो इस दृश्य पर दर्शक भी काफी अभी भूत हो जाते हैं ।
मुख्यकलाकारों में भरतरी हरी का प्रभावी अभिनय ललित मिश्रा ने गुरु गोरखनाथ का अभिनय हर्ष ने एवं विक्रम का अभिनय सुभाष गौड़ ने विद्यासागर की भूमिका लोकेश मिश्रा एवं महारानी पिंगला का अभिनय जयपुर से आई महिला कलाकार कुमारी कुणाल ने किया ।
नाटक का निर्देशन कर रहे हैं संस्था के यशस्वी एवं युवा महा निर्देशक मनोज कुमार गोयल एवं संगीत दिया है संगीत निर्देशक जितेंद्र गुप्ता ने जिसके मधुर संगीत से दर्शक काफी प्रभावित हो रहे हैं ।

