स्वयं सिद्धा आश्रम का औचक निरीक्षण: वृद्धजनों की देखरेख में गंभीर लापरवाही उजागर, अधिकांश सीसीटीवी कैमरे मिले बंद; वृद्धजन खुद धो रहे कपड़े
खैरथल (हीरालाल भूरानी) राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल के अध्यक्ष शैलेंद्र व्यास के दिशा-निर्देशानुसार शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल के सचिव श्री अजीत कुडी ने स्थानीय स्वयं सिद्धा आश्रम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान आश्रम में रह रहे वृद्धजनों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों से जुड़ी कई गंभीर और चिंताजनक खामियां सामने आईं, जिस पर सचिव ने प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के आदेश जारी किए हैं।
बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाइयां देना गंभीर अपराध:
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी और गंभीर लापरवाही स्वास्थ्य सेवाओं में पाई गई। आश्रम में रह रहे बीमार बुजुर्गों को बिना किसी योग्य डॉक्टर की सलाह या लिखित पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के सीधे ही दवाइयां दी जा रही थीं। वयोवृद्ध जनों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए लंबे समय से डॉक्टरों की कोई विजिट भी नहीं हुई थी। सचिव श्री कुडी ने इसे बुजुर्गों के जीवन के साथ खिलवाड़ और गंभीर लापरवाही बताते हुए ऐसी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए।
सुरक्षा राम भरोसे, बंद मिले अधिकांश सीसीटीवी:
आश्रम परिसर में सुरक्षा को लेकर भारी चूक सामने आई। सुरक्षा के दृष्टिगत लगाए गए अधिकांश सीसीटीवी कैमरे बंद (अक्रियाशील) पाए गए और पूरे परिसर में केवल दो कैमरे ही चालू हालत में थे। इसके अतिरिक्त, औचक निरीक्षण की भनक लगते ही या निरीक्षण के समय आश्रम के मुख्य संचालक भी मौके से नदारद (अनुपस्थित) मिले।
बुजुर्ग खुद धो रहे अपने कपड़े:
निरीक्षण में यह अमानवीय तथ्य भी सामने आया कि आश्रम प्रबंधन द्वारा वृद्धजनों को कपड़े धोने की कोई सुविधा नहीं दी जा रही थी। वयोवृद्ध होने के बावजूद बुजुर्ग अपने कपड़े स्वयं धोने को मजबूर थे। प्रबंधन द्वारा उन्हें केवल साबुन और सर्फ उपलब्ध कराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया था।
किराए के भवन में संचालित है आश्रम:
आश्रम के व्यवस्थापक कमलेश कुमार ने सचिव को बताया कि 50 व्यक्तियों की क्षमता वाला यह आश्रम वर्तमान में एक किराए के भवन में संचालित हो रहा है, जहां कुल 8 कर्मचारी कार्यरत हैं। निरीक्षण के दौरान आश्रम में 7 से 8 वृद्धजन निवास करते मिले, जिनसे सचिव ने व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। हालांकि, रसोईघर के निरीक्षण में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन (दाल-चपाती) तैयार होता पाया गया और कमरों में पंखों की व्यवस्था संतोषजनक थी।
सुधार न होने पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई:
निरीक्षण के पश्चात सचिव अजीत कुडी ने प्रबंधन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि आश्रम में निवास कर रहे प्रत्येक वृद्धजन को सम्मानजनक, सुरक्षित और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना प्रबंधन की वैधानिक जिम्मेदारी है, जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि:
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सभी बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत दुरुस्त कर चालू किया जाए।
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बिना डॉक्टर के लिखित पर्चे के कोई भी दवा बुजुर्गों को न दी जाए तथा सरकारी अस्पताल के समन्वय से नियमित हेल्थ चेकअप सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने साफ तौर पर सचेत किया कि यदि निर्धारित समयावधि में स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आश्रम प्रबंधन के विरुद्ध विधि सम्मत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


