बिजली पोलों पर निजी ऑपरेटरों का अवैध केबल जाल; शॉर्ट सर्किट का खतरा, विद्युत निगम को हर साल ₹12.50 लाख के राजस्व का नुकसान
खैरथल (हीरालाल भूरानी) शहर में निजी इंटरनेट और केबल ऑपरेटरों ने बड़ी संख्या में बिजली पोलों का उपयोग बिना अनुमति के केबल नेटवर्क बिछाने के लिए कर रखा है।
खैरथल सब डिवीजन क्षेत्र में लगे करीब 5000 बिजली पोलों में से लगभग 2500 पोलों पर इंटरनेट और केबल के तार लटके हुए हैं। इससे जहां निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं। नियमों के अनुसार किसी भी निजी कंपनी को बिजली पोल पर केबल या तार लगाने से पहले विद्युत निगम से अनुमति लेना आवश्यक होता है। इसके साथ ही प्रति पोल प्रतिवर्ष 500 रुपए किराया जमा कराना भी अनिवार्य है। अनुमान है कि इससे विभाग को प्रतिवर्ष करीब 12.50 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
खैरथल सब डिवीजन के हरियाली, मंडी, अंबेडकर चौक, शैलजा कॉलोनी, खैरथल गांव, कुठली, मातोर रोड, आनंद नगर कॉलोनी सहित एग्रीकल्चर और रीको फीडर क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बिजली पोलों पर केबलों का जाल फैला हुआ है।
बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई पोल पूरी तरह तारों से ढंके नजर आते हैं। उलझे हुए तारों के कारण शॉर्ट सर्किट, आगजनी और अन्य दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। साथ ही शहर की सौंदर्यता भी प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार इस वर्ष कुछ कंपनियों ने बिजली पोलों के उपयोग की अनुमति के लिए आवेदन किए हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर स्वीकृति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अनुमति अभी प्रक्रियाधीन है तो पोलों पर पहले से लगे केबल और तार किस आधार पर लगाए गए हैं।
इस संबंध में जयपुर विद्युत वितरण निगम खैरथल के सहायक अभियंता दिनेश भड़ाना ने बताया कि पोलों पर बिना अनुमति लगाए गए तार अवैध श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


