उत्तराखंड की हस्त कला ने मन मोहा, प्रिया रावत कर रही पश्चात संस्कृति का मुकाबला
हलैना (विष्णु मित्तल) भारतीय संस्कृति और कला के दर्शन करने एव उसे खरीद कर घर प्रतिष्ठा और अपने विश्राम गृह में लगाने केलिए देश-विदेश के लोग भी तरसते हैं।देश के किसी भी राज्य में चले जाओ प्रत्येक राज्य की कला,भाषा, वेशभूषा अलग-अलग ही नजर आती है लेकिन सभी कला और सोच विचार सनातन धर्म,भारतीय संस्कृति देश भक्ति ,समाज सेवा, मानव सेवा का ज्ञान देती है। ऐसी कला को खरीदने के लिए कल की पहचान करने वाला मुंह मांगी भी कीमत दे जाता है। ये कलाएं अब आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक हो रही हैं। देश के कई स्थानों पर महिलाएं कल को जीवित रखे हुए हैं और अपने परिवार का लालन-पालन भी कर रही हैं भारत की कल को विदेशी कल भी असफल नहीं कर रही है जो भी भारतीय कला को देखा है उसकी मां उसे खरीदने के लिए करता है और वह उसे कल की तस्वीर को अवश्य खरीद कर अपने लिए घर ले जाता है ऐसी कला उत्तराखंड की देखने को मिली।जिसको उत्तराखंड निवासी हाल दिल्ली प्रिया रावत जीवन्त रखे हुए हैं। जो स्वयं उत्तराखंड की कला को 50 से अधिक प्रकार के आइटम बनाकर अपने परिवार का लालन पालन कररही है। प्रिया रावत बताती हैं कि इस कला को बनाने में शुरू में कई प्रकार की दिक्कतें आई लेकिन अब इस कला को बनाना मुझे आसान हो गया 1 घंटे में दो प्रकार की आकृतियां बन जाती है प्रतिदिन 15 से 20 आकृतियां बनाकर प्रतिदिन 400 से ₹500 की बचत हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत देश में प्रत्येक राज की कला अपनी पहचान रखती है जिसमें उत्तराखंड राजस्थान गुजरात केरल तमिलनाडु महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश हरियाणा की कला देश में अपनी पहचान रखती है। मेरे द्वारा बनाई हुई कला 150 रुपए से₹10000 तक की आसानी से बिक जाती है जिस काल में हमको 10 से 15% की बचत होती है। समृद्ध भारत अभियान निदेशक सीताराम गुप्ता बताया कि भारतीय कला और संस्कृति की पहचान विश्व में आज भी कायम है यहां की कला, संस्कृति को विदेशी लोग अपनाने लगे हैं। देश की कलम महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही है जो कल से संबंधित वस्तुएं स्वदेशी बस्तियां बनाकर अपने परिवार का लालन पालन कर रही है ऐसी कला व स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार प्रसार एवं आमजन के उपयोग के लिए मेजर ध्यानचंद स्टेडियम नई दिल्ली पर 5 नवंबर से 10 नवंबर तक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें भारी संख्या में दुकानें सजी हुई है जहां जिनका प्रदर्शन हो रहा है और लोग भी अपने खरीद रहे हैं जिस कार्यक्रम में भरतपुर जिले से समृद्ध भारत अभियान के द्वारा 10 प्रकार की स्टाइल भेजी गई है।